रायगढ़ में बड़ा पर्यावरण घोटाला: नवदुर्गा स्टील पर वनभूमि को 'फ्लाइ ऐश' से पाटने और पेड़ काटने का गंभीर आरोप

 



शिकायतकर्ता अजय चकोले ने उठाई उच्चस्तरीय जांच की मांग; एक माह बाद भी कार्रवाई न होने पर खरसिया वन अमले पर उठे सवाल

रायपुर / रायगढ़:

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के औद्योगिक क्षेत्र में पर्यावरण और वन संरक्षण नियमों की धज्जियां उड़ाने का एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। ग्राम सराईपाली (बरपाली) स्थित उद्योग M/s Nav Durga Steel and Power Ltd. पर वन विभाग की आरक्षित/संरक्षित भूमि पर अवैध रूप से भारी मात्रा में फ्लाइ ऐश (उड़न राख) डंप करने और पेड़ों की अंधाधुंध कटाई करने का आरोप लगा है।

इस पूरे मामले की लिखित शिकायत अजय चकोले (निवासी- रायपुर) ने वनमण्डलाधिकारी (DFO) रायगढ़ को सौंपी है। शिकायत में न केवल उद्योग प्रबंधन की मनमानी को उजागर किया गया है, बल्कि वन विभाग के स्थानीय अमले की संदिग्ध कार्यशैली और सुस्ती पर भी कड़े सवाल खड़े किए गए हैं।

एक माह से ठंडे बस्ते में जांच, सांठगांठ की आशंका

अजय चकोले द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, इस अवैध कब्जे और पर्यावरण विनाश की शिकायत लगभग एक महीने पहले की गई थी। रायगढ़ DFO कार्यालय से इस मामले की जांच खरसिया वन परिक्षेत्र (Range) को सौंपी गई थी। हालांकि, एक पूरा महीना बीत जाने के बावजूद जांच अधिकारी ने अब तक न तो कोई स्पष्ट और निष्पक्ष रिपोर्ट सौंपी है और न ही अवैध डंपिंग पर रोक लगाई है।

जांच में हो रही इस लगातार देरी के कारण उद्योग प्रबंधन को बेखौफ होकर और अधिक फ्लाइ ऐश डंप करने का अवसर मिल रहा है। इससे जंगल, मिट्टी, आसपास के जलस्रोत और संपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) को अपूरणीय क्षति पहुंच रही है।

क्या वन अधिकारियों को अपनी सीमाओं का ज्ञान नहीं?

शिकायत में अजय चकोले ने वन परिक्षेत्र अधिकारी (RFO) की कार्यप्रणाली पर तीखा प्रहार करते हुए कहा है कि यदि स्थल निरीक्षण के बाद भी स्पष्ट रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की जा रही है, तो यह अत्यंत चिंताजनक है।

  • क्या स्थानीय वन अमले को अपने ही क्षेत्र के कक्ष क्रमांक (Compartment No.) और वनभूमि की सीमाओं का ज्ञान नहीं है?

  • या फिर उद्योगपति के प्रभाव में आकर मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है?

अजय चकोले द्वारा DFO रायगढ़ से की गईं प्रमुख मांगें:

पर्यावरण संरक्षण और सरकारी संपत्ति की सुरक्षा को लेकर अजय चकोले ने DFO रायगढ़ से तत्काल निम्नलिखित कड़े कदम उठाने की मांग की है:

  1. उच्चस्तरीय स्वतंत्र जांच: मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच केवल खरसिया रेंज तक सीमित न रखी जाए, बल्कि वरिष्ठ अधिकारियों की एक स्वतंत्र उच्चस्तरीय जांच टीम गठित की जाए।

  2. तत्काल डंपिंग पर रोक: जांच पूरी होने तक नवदुर्गा स्टील द्वारा वनभूमि पर की जा रही फ्लाइ ऐश की डंपिंग को तुरंत प्रभाव से बंद कराया जाए।

  3. सीमांकन व पंचनामा: राजस्व और वन अभिलेखों का मिलान कर कक्ष क्रमांक व क्षेत्रफल स्पष्ट किया जाए। साथ ही मौके पर मौजूद राख के ढेर की फोटोग्राफी/वीडियोग्राफी कराकर विधिवत पंचनामा तैयार किया जाए।

  4. काटे गए पेड़ों का हिसाब: वन क्षेत्र में काटे गए पेड़ों की प्रजाति, संख्या और इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जांच की जाए।

  5. अनुमति पत्र की जांच व FIR: क्या नवदुर्गा स्टील के पास वनभूमि पर फ्लाइ ऐश डालने की कोई वैध विभागीय अनुमति है? यदि नहीं, तो भारतीय वन अधिनियम एवं पर्यावरण संरक्षण कानून के तहत तत्काल FIR दर्ज कर कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाए।

  6. लापरवाह अफसरों पर कार्रवाई: एक महीने तक जांच अटका कर रखने वाले जिम्मेदार अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा जाए।

पर्यावरणप्रेमियों और ग्रामीणों में भारी आक्रोश

औद्योगिक कचरे (Fly Ash) के इस प्रकार खुलेआम जंगलों में फेंके जाने से रायगढ़ के पर्यावरण कार्यकर्ताओं और स्थानीय ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। उड़न राख के बारीक कण हवा में घुलकर सांस की बीमारियों का कारण बन रहे हैं और बारिश के पानी के साथ मिलकर भूजल को जहरीला बना रहे हैं।

अब देखना यह होगा कि रायगढ़ DFO इस शिकायत पर कितनी तत्परता दिखाते हैं और क्या नवदुर्गा स्टील एंड पावर लिमिटेड जैसी रसूखदार कंपनी पर शिकंजा कस पाता है या यह मामला भी कागजी पत्राचार में उलझकर रह जाएगा।

Reported by: The HDSMIT Universal Herald Chhattisgarh Desk

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