मराठा आरक्षण आंदोलन: मनोज जरांगे पाटिल के अनशन का सातवां दिन; 'सगे-सोयरे' कानून पर अड़े आंदोलनकारी, स्वास्थ्य बिगड़ने से तनाव

 

मनोज जरांगे पाटिल के अनशन का सातवां दिन; 'सगे-सोयरे' कानून पर अड़े आंदोलनकारी, स्वास्थ्य बिगड़ने से तनाव

  • महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव की आचार संहिता के बीच मराठा आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर राज्य की राजनीति के केंद्र में आ गया है। जालना जिले के अंतरवाली सराती गांव में मराठा आंदोलन के प्रणेता मनोज जरांगे पाटिल के बेमियादी आमरण अनशन का आज सातवां दिन है। पाटिल अपनी मांग पर अड़े हैं कि राज्य सरकार मराठा समुदाय के रक्त संबंधियों को ओबीसी (OBC) कोटे से कुनबी प्रमाण पत्र देने के लिए 'सगे-सोयरे' के वादे को तुरंत वैधानिक रूप दे। अनशन के कारण उनके स्वास्थ्य और वाइटल्स (ब्लड प्रेशर और शुगर लेवल) में आ रही गिरावट को देखते हुए जिला प्रशासन ने डॉक्टरों की एक विशेष टीम को चौबीसों घंटे तैनात किया है। चुनाव से ठीक पहले इस बड़े आंदोलन के लंबा खींचने के कारण राज्य के दोनों प्रमुख राजनीतिक खेमों (महायुति और महाविकास अघाड़ी) की चुनावी चिंताएं बेहद बढ़ गई हैं।


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