राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की छत्तीसगढ़ के युवाओं से अपील: 'चिकित्सा और तकनीक का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे'

 

रायपुर में आयोजित विशेष दीक्षांत समारोह के मंच से मेधावी छात्र-छात्राओं को स्वर्ण पदक प्रदान करतीं माननीय राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू।

  • भारत की माननीय राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू के छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर आगमन और उनके भव्य दीक्षांत संबोधनों ने राज्य के शैक्षणिक और सामाजिक गलियारों में एक नई ऊर्जा का संचार कर दिया है। अपने विशेष दो-दिवसीय दौरे पर रायपुर पहुँचीं राष्ट्रपति मुर्मू ने राष्ट्रीय उच्च शिक्षण संस्थानों (जैसे एम्स रायपुर, आईआईटी और एनआईटी) के मेधावी छात्र-छात्राओं को उपाधियाँ प्रदान कीं। इस दौरान उन्होंने मंच से छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, जनजातीय कला और आधुनिक युवाओं की मेधा की जमकर सराहना की।
डिग्री केवल करियर के लिए नहीं, सामाजिक बदलाव का माध्यम बने:
दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने देश और राज्य के युवाओं को उनके जीवन के सबसे बड़े कर्तव्य की याद दिलाई। उन्होंने अपने भाषण में स्पष्ट शब्दों में कहा, "शिक्षण संस्थानों से मिलने वाली डिग्री केवल एक बेहतर करियर या व्यक्तिगत आर्थिक उन्नति का साधन नहीं है। यह समाज और राष्ट्र के प्रति आपकी जिम्मेदारी का एक नया दस्तावेज है।" उन्होंने विशेष रूप से चिकित्सा और तकनीकी क्षेत्र के स्नातकों से अपील की कि वे अपने ज्ञान और कौशल का उपयोग समाज के सबसे पिछड़े, गरीब और दूरस्थ अंचलों (जैसे बस्तर और सरगुजा) में रहने वाले नागरिकों के जीवन स्तर को सुधारने के लिए करें।
छत्तीसगढ़ की जनजातीय संस्कृति और प्रगति की सराहना:
राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में छत्तीसगढ़ की धरती को नमन करते हुए कहा कि यह प्रदेश प्राकृतिक संपदा के साथ-साथ मानवीय मूल्यों और सांस्कृतिक सह-अस्तित्व का एक अनूठा उदाहरण है। उन्होंने कहा कि यहां के जनजातीय समुदायों की जीवनशैली हमें पर्यावरण संरक्षण और प्रकृति के साथ तालमेल बिठाकर रहने का सबसे बड़ा पाठ सिखाती है। राष्ट्रपति ने राज्य सरकार द्वारा शिक्षा, स्वास्थ्य और खेल के क्षेत्र में किए जा रहे डिजिटल और बुनियादी ढांचागत सुधारों की भी सराहना की और कहा कि छत्तीसगढ़ तेजी से विकसित भारत के विज़न को साकार करने की ओर कदम बढ़ा रहा है।


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