सरगुजा के मैनपाट में भूस्खलन की वास्तविक निगरानी के लिए इसरो (ISRO) की मदद से 'सैटेलाइट अर्ली वार्निंग सिस्टम' सक्रिय
स्थान: छत्तीसगढ़ (सरगुजा - मैनपाट)
द्वारा रिपोर्ट किया गया: द एचडीस्मिट यूनिवर्सल हेराल्ड डेस्क
द्वारा रिपोर्ट किया गया: द एचडीस्मिट यूनिवर्सल हेराल्ड डेस्क
छत्तीसगढ़ के प्रमुख पर्यटन स्थल मैनपाट (सरगुजा) की पहाड़ियों पर मानसून के इस मौसम में लगातार हो रहे भूस्खलन (Landslides) और मिट्टी के धंसाव की गंभीर समस्या को देखते हुए राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने एक बड़ा वैज्ञानिक कदम उठाया है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र (NRSC) के साथ मिलकर मैनपाट के सबसे संवेदनशील पहाड़ी ढलानों पर छत्तीसगढ़ का पहला सैटेलाइट-आधारित 'भूस्खलन अर्ली वार्निंग सिस्टम' (Early Warning System) आज सुबह से पूरी तरह सक्रिय कर दिया गया है।
यह अत्याधुनिक प्रणाली पहाड़ियों की मिट्टी में होने वाली सूक्ष्म हलचल, टेक्टोनिक प्लेट्स के खिसकने और चट्टानों के दबाव को मापने के लिए जमीन के भीतर लगाए गए अत्यधिक संवेदनशील सेंसरों (Extensometers) का उपयोग करती है। यदि किसी पहाड़ी हिस्से में मिट्टी खिसकने या चट्टान गिरने का खतरा उत्पन्न होता है, तो यह सिस्टम तुरंत सैटेलाइट के माध्यम से सरगुजा जिला नियंत्रण कक्ष को आपातकालीन अलार्म भेजेगा, जिससे प्रशासन को प्रभावित गांवों और सड़कों को समय रहते खाली कराने के लिए कम से कम 6 से 8 घंटे का अतिरिक्त समय मिल जाएगा।
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