छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी ने लॉन्च किया एआई-आधारित स्मार्ट सबस्टेशन ग्रिड, ग्रामीण इलाकों में लो-वोल्टेज की समस्या होगी हमेशा के लिए खत्म
[भारत / छत्तीसगढ़ / रायपुर]
विस्तृत समाचार:
छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड (CSPDCL) ने राज्य के ग्रामीण और कृषि प्रधान क्षेत्रों की बिजली व्यवस्था में आमूलचूल बदलाव लाने के उद्देश्य से एक ऐतिहासिक तकनीकी आधुनिकीकरण परियोजना के पहले चरण की शुरुआत की है। इस मल्टी-करोड़ इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट के तहत राजनांदगांव, महाਸਮੁੰਦ और धमतरी जिलों के ग्रामीण अंचलों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर आधारित उन्नत स्मार्ट सबस्टेशनों का नेटवर्क तैनात किया जा रहा है। यह तकनीकी ग्रिड इंटेलिजेंट लोड-बैलेंसिंग एल्गोरिदम, स्वचालित फॉल्ट-डिटेक्शन सेंसर और रीयल-टाइम टेलीमेट्री नोड्स से सुसज्जित है। इस आधुनिक प्रणाली को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि यह खरीफ फसल की सिंचाई के दौरान ग्रामीण इलाकों में होने वाले अप्रत्याशित वोल्टेज ड्रॉप, अचानक ट्रांसफार्मर जलने और लंबी बिजली कटौती की समस्याओं को हमेशा के लिए समाप्त कर देगा, जिससे छत्तीसगढ़ देश में स्मार्ट ग्रामीण बिजली वितरण का एक आदर्श मॉडल बनकर उभरेगा।
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छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड (CSPDCL) ने राज्य के ग्रामीण और कृषि प्रधान क्षेत्रों की बिजली व्यवस्था में आमूलचूल बदलाव लाने के उद्देश्य से एक ऐतिहासिक तकनीकी आधुनिकीकरण परियोजना के पहले चरण की शुरुआत की है। इस मल्टी-करोड़ इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट के तहत राजनांदगांव, महाਸਮੁੰਦ और धमतरी जिलों के ग्रामीण अंचलों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर आधारित उन्नत स्मार्ट सबस्टेशनों का नेटवर्क तैनात किया जा रहा है। यह तकनीकी ग्रिड इंटेलिजेंट लोड-बैलेंसिंग एल्गोरिदम, स्वचालित फॉल्ट-डिटेक्शन सेंसर और रीयल-टाइम टेलीमेट्री नोड्स से सुसज्जित है। इस आधुनिक प्रणाली को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि यह खरीफ फसल की सिंचाई के दौरान ग्रामीण इलाकों में होने वाले अप्रत्याशित वोल्टेज ड्रॉप, अचानक ट्रांसफार्मर जलने और लंबी बिजली कटौती की समस्याओं को हमेशा के लिए समाप्त कर देगा, जिससे छत्तीसगढ़ देश में स्मार्ट ग्रामीण बिजली वितरण का एक आदर्श मॉडल बनकर उभरेगा।
विगत कई दशकों से छत्तीसगढ़ के ग्रामीण क्षेत्रों में मानसून और खेती के पीक सीजन के दौरान बिजली की भारी समस्या देखी जाती थी। जब हजारों किसान खेतों की सिंचाई के लिए एक साथ उच्च क्षमता वाले कृषि पंप चालू करते थे, तो पारंपरिक ग्रिड पर अत्यधिक लोड बढ़ जाता था, जिसके कारण स्थानीय लाइन फॉल्ट और ट्रांसफार्मर ब्लास्ट की घटनाएं आम थीं। नया एआई-आधारित ग्रिड इस प्रणालीगत कमी को पूरी तरह से दूर करता है क्योंकि यह एक लाइव, सेल्फ-हीलिंग (स्वतः ठीक होने वाले) नेटवर्क के रूप में काम करता है। इसके प्रोसेसिंग नोड्स लगातार विभिन्न कृषि सर्किटों में वास्तविक बिजली खपत के आंकड़ों का विश्लेषण करते हैं और किसी भी सबस्टेशन को उसकी अंतिम क्षमता तक पहुंचने से पहले ही बिजली के लोड को दूसरे सबस्टेशन पर ऑनलाइन ट्रांसफर कर देते हैं। इसके अतिरिक्त, यदि आंधी-तूफान या पेड़ गिरने के कारण किसी लाइन में फिजिकल फॉल्ट आता है, तो यह सिस्टम कुछ ही मिलीसेकंड में प्रभावित हिस्से को अलग कर वैकल्पिक रूट से बिजली की सप्लाई बहाल कर देता है।
राज्य के किसान संगठनों और कृषि सहकारी समितियों ने बिजली कंपनी के इस आधुनिक कदम का पुरजोर स्वागत किया है। किसानों का कहना है कि धान की फसल की बेहतर पैदावार के लिए निर्बाध और स्थिर वोल्टेज वाली बिजली एक अनिवार्य आवश्यकता है, और इस सिस्टम से उनकी लागत और समय दोनों की बचत होगी। कृषि बिजली व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए CSPDCL ने एक विशेष 24 घंटे की समर्पित कृषि विद्युत हेल्पलाइन सेवा भी शुरू की है, जिसके तहत ग्रामीण क्षेत्रों के लिए ऑफ-रोड वाहनों से लैस त्वरित प्रतिक्रिया दल (QRT) गठित किए गए हैं जो किसी भी बड़े फॉल्ट की सूचना मिलते ही सीधे मौके पर पहुंचकर मरम्मत कार्य पूरा करेंगे। राज्य के ऊर्जा विभाग की योजना है कि इस ग्रामीण पायलट प्रोजेक्ट की सफलता और इसके वित्तीय आंकड़ों की समीक्षा करने के बाद, इस एआई ग्रिड का विस्तार कोरबा और रायगढ़ जैसे भारी औद्योगिक और कोयला खनन बेल्टों में भी किया जाएगा, ताकि बिजली के ट्रांसमिशन लॉस को न्यूनतम स्तर पर लाया जा सके।
Reported By The Hdsmit Universal Hearld Desk

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