रबो डैम में मछलियों की मौत: नव दुर्गा एथेनॉल प्लांट के अपशिष्ट जल की हो उच्चस्तरीय जांच

रबो डैम प्रदूषण मामले के शिकायतकर्ता और स्वास्तिक मजदूर सेवा समिति के अध्यक्ष अजय चकोले


रायगढ़ जिले के तमनार तहसील अंतर्गत ग्राम बरपाली स्थित नव दुर्गा प्राइवेट लिमिटेड की 100 KLPD एथेनॉल/डिस्टिलरी इकाई के जल उपयोग और अपशिष्ट जल को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। उद्योग से निकलने वाला संदिग्ध पानी नाले के जरिए रबो डैम (Rabo Dam) में जा रहा है, जिससे जल प्रदूषण की आशंका पैदा हो गई है और मछलियों के मरने की घटनाओं से ग्रामीणों में आक्रोश है।  

इस गंभीर विषय पर स्वास्तिक मजदूर सेवा समिति के अध्यक्ष और शिकायतकर्ता अजय चकोले ने मुख्यमंत्री से तत्काल संज्ञान लेकर उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।  

भूजल दोहन पर शिकायतकर्ता ने उठाए सवाल

दस्तावेजों के अनुसार, प्लांट की उत्पादन क्षमता प्रतिदिन लगभग 1 लाख लीटर एथेनॉल है। अजय चकोले ने सवाल उठाया है कि इतने बड़े प्लांट के लिए पानी का मुख्य स्रोत बोरवेल ही है, इसलिए उद्योग परिसर के सभी बोरवेल की गहराई, क्षमता और पिछले 12 महीनों में निकाले गए भूजल की मात्रा की जांच होनी चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट करने की मांग की है कि उद्योग के पास भूजल दोहन की वैधानिक अनुमति (NOC) है या नहीं।  

प्रशासन और मुख्यमंत्री से शिकायतकर्ता की प्रमुख मांगें:

'वाटर बैलेंस' सार्वजनिक हो: शिकायतकर्ता ने मांग की है कि उद्योग का पिछले 12 महीनों का 'Complete Water Balance' तैयार कराया जाए, ताकि यह पता चले कि Wastewater और Spent Wash कहां जा रहा है।  

नाले और ड्रेनेज की जांच: उद्योग से रबो डैम तक जाने वाले पूरे ड्रेनेज रूट की मौके पर जांच, वीडियोग्राफी और फ्लो मेजरमेंट (Flow Measurement) कराया जाए।  

वैज्ञानिक जांच: उद्योग के ETP, नाले और रबो डैम से सैंपल लेकर NABL मान्यता प्राप्त लैब में जांच कराई जाए। साथ ही मृत मछलियों का साइंटिफिक एग्जामिनेशन और डैम के सेडिमेंट की जांच हो।  

ग्राम पंचायत का पंचनामा: 01 सितंबर 2026 को ग्राम पंचायत सचिव द्वारा ग्रामीणों के समक्ष बनाए गए पंचनामे को मुख्य दस्तावेज मानते हुए प्रत्यक्षदर्शियों के बयान दर्ज किए जाएं।  

औचक निरीक्षण: उद्योग का बिना पूर्व सूचना के सरप्राइज इंस्पेक्शन (Surprise Inspection) कर बोरवेल, ETP और डिस्चार्ज पॉइंट्स की जांच की जाए।  

शिकायतकर्ता अजय चकोले ने स्पष्ट किया है कि यह केवल एक उद्योग का मामला नहीं, बल्कि रबो डैम, भूजल और पर्यावरण से जुड़ा जनहित का विषय है। उन्होंने मांग की है कि प्रदूषण प्रमाणित होने पर इकाई के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए और प्रभावित जलस्रोत का 'इकोलॉजिकल रेस्टोरेशन' (Ecological Restoration) हो

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