बस्तर जनजातीय विकास बोर्ड ने जगदलपुर में स्थापित किया देश का पहला अत्याधुनिक हस्तशिल्प और डोकरा कला वैश्विक निर्यात केंद्र

 [भारत / छत्तीसगढ़ / जगदलपुर]

विस्तृत समाचार:
छत्तीसगढ़ के पारंपरिक और विश्व प्रसिद्ध हस्तशिल्प को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई ऊंचाइयों पर ले जाने और वनांचल के ग्रामीण कलाकारों को बिचौलियों के आर्थिक शोषण से पूरी तरह मुक्त करने की दिशा में बस्तर जनजातीय विकास बोर्ड ने एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। जगदलपुर जिला मुख्यालय में राज्य के पहले अत्याधुनिक एकीकृत हस्तशिल्प हब और 'ग्लोबल एक्सपोर्ट सेंटर' की स्थापना को आधिकारिक प्रशासनिक मंजूरी दे दी गई है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना का मुख्य उद्देश्य बस्तर की प्राचीन 'डोकरा कला' (लॉस्ट-वैक्स मेटल कास्टिंग), लौह शिल्प (आयरन क्राफ्ट) और टसर सिल्क बुनाई से जुड़े हजारों आदिवासी कारीगरों को आधुनिक तकनीकी टूलकिट प्रदान करना, वैश्विक बाजार की मांग के अनुसार डिजाइनिंग का प्रशिक्षण देना और उन्हें एक मजबूत डिजिटल ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराना है, ताकि वे अपने उत्पादों को बिना किसी बिचौलिए के सीधे अमेरिका और यूरोप के प्रीमियम बाजारों में बेच सकें।
बस्तर की डोकरा शिल्प कला, जिसमें शुद्ध प्राकृतिक मोम के सांचों और पिघली हुई धातु (बेल मेटल) का उपयोग करके बेहद बारीक और अद्भुत कलाकृतियां बनाई जाती हैं, अपनी मौलिकता और सांस्कृतिक प्रतीकों के कारण पूरी दुनिया के कला प्रेमियों और सजावट बाजारों में भारी मांग रखती है। लेकिन उचित विपणन (मार्केटिंग) और अंतरराष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स की कमी के कारण घने जंगलों में रहने वाले ये गरीब आदिवासी कलाकार अपनी अमूल्य कलाकृतियों को स्थानीय बाजारों में बेहद कम दामों पर बेचने को मजबूर थे। जगदलपुर में बन रहा यह नया वैश्विक निर्यात केंद्र इस समस्या को पूरी तरह से समाप्त कर देगा। यहाँ नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन (NID) और निफ्ट (NIFT) के विशेषज्ञ डिजाइनरों द्वारा विशेष कार्यशालाएं चलाई जा रही हैं, जो इन कलाकारों को उनकी कला की मूल जनजातीय आत्मा को सुरक्षित रखते हुए आधुनिक घरेलू सजावट (Home Decor) के अनुसार ढालने में मदद कर रहे हैं।
इस विशाल एक्सपोर्ट हब के भीतर एक हाई-डेफिनिशन डिजिटल फोटोग्राफी स्टूडियो, एक अंतरराष्ट्रीय पैकेजिंग यूनिट और एक समर्पित जीआई (Geographical Indication) वेरिफिकेशन सेंटर भी बनाया जा रहा है, जो बस्तर की पारंपरिक कलाकृतियों की ब्रांडिंग और उनकी शुद्धता का प्रमाण पत्र ऑनलाइन जारी करेगा, ताकि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मशीनों द्वारा बनाए जाने वाले नकली और सस्ते चीनी उत्पादों की बिक्री पर पूरी तरह रोक लगाई जा सके। प्रशासन ने पुष्टि की है कि इस परियोजना के पहले चरण में बस्तर संभाग के अंदरूनी गांवों के लगभग 1,500 से अधिक मास्टर क्राफ्ट्समैन को एक सहकारी समिति के तहत जोड़ा जा रहा है, और उनके उत्पादों की ऑनलाइन बिक्री से होने वाली पूरी कमाई सीधे उनके बैंक खातों में ट्रांसफर की जाएगी, जिससे वनांचल की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में स्वावलंबन और समृद्धि का एक नया अध्याय शुरू होगा।

Reported By The Hdsmit Universal Hearld Desk

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