कांकेर जिला अस्पताल में उन्नत टेली-मेडिसिन सेवाओं का शुभारंभ; वनांचल के मरीजों को रायपुर के बड़े विशेषज्ञों से मिलेगी सीधे ऑनलाइन सलाह

[भारत / छत्तीसगढ़ / कांकेर]
छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा विभाग ने राज्य के सुदूर और ग्रामीण अंचलों में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को बेहतर बनाने की दिशा में आज एक क्रांतिकारी कदम उठाते हुए उत्तर बस्तर (कांकेर) जिला चिकित्सालय में एक अत्याधुनिक 'टेली-मेडिसिन और ई-संजीवनी हब' का सफलतापूर्वक शुभारंभ किया है। इस आधुनिक डिजिटल चिकित्सा नेटवर्क के माध्यम से अब कांकेर और उसके आसपास के घोर नक्सल-संवेदनशील और दुर्गम पहाड़ी गांवों के प्राथमिक व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में आने वाले गंभीर रोगियों को राजधानी रायपुर के डॉ. भीमराव अंबेडकर अस्पताल, पंडित जवाहरलाल नेहरू मेमोरियल मेडिकल कॉलेज और एम्स (AIIMS) के वरिष्ठ सुपर-स्पेशलिस्ट डॉक्टरों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सीधे उच्च स्तरीय परामर्श और त्वरित इलाज की सुविधा मिलेगी। इस नई व्यवस्था से वनांचल के गरीब आदिवासियों को इलाज के लिए सैकड़ों किलोमीटर की लंबी और महंगी यात्रा करने की मजबूरी से पूरी तरह राहत मिलेगी।
इस टेली-मेडिसिन हब के भीतर उच्च गति वाले इंटरनेट कनेक्शन, डिजिटल डायग्नोस्टिक उपकरण और रीयल-टाइम डेटा ट्रांसमिशन सॉफ्टवेयर लगाए गए हैं, जो कांकेर के डॉक्टरों को मरीज की एक्स-रे रिपोर्ट, ईसीजी (ECG), ब्लड टेस्ट के आंकड़े और अन्य महत्वपूर्ण मेडिकल डेटा को तुरंत रायपुर के विशेषज्ञ डॉक्टरों के साथ साझा करने की अनुमति देते हैं। रायपुर में बैठे न्यूरोलॉजिस्ट, कार्डियोलॉजिस्ट और शिशु रोग विशेषज्ञ कंप्यूटर स्क्रीन पर मरीज की लाइव स्थिति को देखकर और कांकेर के स्थानीय डॉक्टरों से चर्चा कर तुरंत दवाओं का डिजिटल पर्चा (प्रिस्क्रिप्शन) जनरेट कर देते हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यह प्रणाली आपातकालीन स्थितियों, जैसे कि अचानक आए दिल के दौरे, ब्रेन स्ट्रोक या प्रसव के दौरान होने वाली जटिलताओं में मरीजों की जान बचाने के लिए एक गेम-चेंजर साबित होने वाली है।
इसके अतिरिक्त, इस डिजिटल स्वास्थ्य क्रांति को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने कांकेर के सुदूर गांवों के लिए जीवन रक्षक दवाओं से लैस विशेष मोबाइल मेडिकल वैन भी तैनात की हैं। ये वैन रीयल-टाइम में सैटेलाइट के माध्यम से मुख्य टेली-मेडिसिन हब से जुड़ी रहेंगी और हाट-बाजारों में जाकर ग्रामीणों की निःशुल्क जांच करेंगी। जिला प्रशासन ने कड़े निर्देश जारी किए हैं कि टेली-मेडिसिन के जरिए लिखी जाने वाली सभी दवाइयां जिला अस्पताल और स्थानीय स्वास्थ्य केंद्रों में मरीजों को पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध कराई जाएं। इस आधुनिक पहल से जहां छत्तीसगढ़ के ग्रामीण क्षेत्रों में शिशु और मातृ मृत्यु दर को न्यूनतम स्तर पर लाने में मदद मिलेगी, वहीं यह प्रोजेक्ट देश में डिजिटल इंडिया और स्वास्थ्य के क्षेत्र में सुदूर वनांचल को सीधे देश के बड़े चिकित्सा केंद्रों से जोड़ने का एक अनुकरणीय उदाहरण बनकर उभरा है।

Reported By The Hdsmit Universal Hearld Desk 

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