नारायणपुर बांस शिल्प क्लस्टर के लिए आधुनिक मशीनों और टूलकिट का वितरण; पारंपरिक कला को मिल रहा है नया आयाम
[भारत / छत्तीसगढ़ / नारायणपुर]
छत्तीसगढ़ के घोर अबूझमाड़ और आदिवासी संस्कृति के केंद्र, नारायणपुर जिले में स्थानीय जनजातीय बांस शिल्पकारों को आर्थिक रूप से सुदृढ़ बनाने, उनके हुनर को आधुनिक बाजार के अनुरूप निखारने और उनके उत्पादन की गति को बढ़ाने के उद्देश्य से जिला प्रशासन और छत्तीसगढ़ हस्तशिल्प विकास बोर्ड के संयुक्त तत्वावधान में आज एक विशेष 'बांस शिल्प क्लस्टर आधुनिकीकरण समारोह' का आयोजन किया गया। इस विशेष कार्यक्रम के तहत जिले के अंदरूनी गांवों से आए सैकड़ों पारंपरिक शिल्पकारों को बांस की छिलनाई, बारीक कटाई, गोलाई देने और अंतिम फिनिशिंग करने वाली अत्याधुनिक पोर्टेबल इलेक्ट्रॉनिक मशीनें और उन्नत टूलकिट्स पूरी तरह से निःशुल्क वितरित किए गए हैं। इन आधुनिक उपकरणों के मिलने से अबूझमाड़ के ये पारंपरिक कारीगर अब बेहद कम समय और न्यूनतम शारीरिक श्रम के साथ अत्यधिक आकर्षक और वैश्विक स्तर की कलाकृतियां तैयार करने में सक्षम हो सकेंगे।
छत्तीसगढ़ के घोर अबूझमाड़ और आदिवासी संस्कृति के केंद्र, नारायणपुर जिले में स्थानीय जनजातीय बांस शिल्पकारों को आर्थिक रूप से सुदृढ़ बनाने, उनके हुनर को आधुनिक बाजार के अनुरूप निखारने और उनके उत्पादन की गति को बढ़ाने के उद्देश्य से जिला प्रशासन और छत्तीसगढ़ हस्तशिल्प विकास बोर्ड के संयुक्त तत्वावधान में आज एक विशेष 'बांस शिल्प क्लस्टर आधुनिकीकरण समारोह' का आयोजन किया गया। इस विशेष कार्यक्रम के तहत जिले के अंदरूनी गांवों से आए सैकड़ों पारंपरिक शिल्पकारों को बांस की छिलनाई, बारीक कटाई, गोलाई देने और अंतिम फिनिशिंग करने वाली अत्याधुनिक पोर्टेबल इलेक्ट्रॉनिक मशीनें और उन्नत टूलकिट्स पूरी तरह से निःशुल्क वितरित किए गए हैं। इन आधुनिक उपकरणों के मिलने से अबूझमाड़ के ये पारंपरिक कारीगर अब बेहद कम समय और न्यूनतम शारीरिक श्रम के साथ अत्यधिक आकर्षक और वैश्विक स्तर की कलाकृतियां तैयार करने में सक्षम हो सकेंगे।
नारायणपुर और बस्तर के आदिवासियों द्वारा बांस से बनाई जाने वाली सुंदर कलाकृतियां, घरेलू उपयोग के सामान, फैंसी लैंपशेड, टोकरियां और पारंपरिक फर्नीचर अपनी मजबूती और अनूठी नक्काशी के लिए हमेशा से ही जाने जाते रहे हैं। लेकिन आधुनिक मशीनों और सही औजारों के अभाव में इन कारीगरों को केवल हाथ के औजारों (जैसे दराती और चाकू) से काम करना पड़ता था, जिसमें एक छोटी सी कलाकृति बनाने में भी कई दिनों का समय लग जाता था और फिनिशिंग में कमी के कारण उन्हें उचित दाम नहीं मिल पाते थे। हस्तशिल्प बोर्ड द्वारा प्रदान की गई ये नई पोर्टेबल मशीनें रिचार्जेबल बैटरियों पर संचालित होती हैं, जिससे वनांचल के उन अंदरूनी गांवों के कारीगर भी इनका आसानी से उपयोग कर सकेंगे जहाँ अभी तक नियमित बिजली की ग्रिड नहीं पहुँच पाई है।
बांस शिल्पकारों के इस पूरे क्लस्टर को एक सुव्यवस्थित व्यावसायिक रूप देने के लिए नारायणपुर में एक 'डिजीटल क्राफ्ट डिजाइन सेंटर' भी सक्रिय किया गया है। इस सेंटर में देश के बड़े कला संस्थानों के विशेषज्ञ डिजाइनर नियमित रूप से आकर स्थानीय युवाओं को आधुनिक इंटीरियर डिजाइनिंग और शहरी घरों की पसंद के अनुसार नई आकृतियां गढ़ने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दे रहे हैं। इसके साथ ही, इन हस्तशिल्प उत्पादों को सीधे तौर पर बड़े शहरों की प्रदर्शनियों और राष्ट्रीय हस्तशिल्प मेलों से जोड़ा जा रहा है। हस्तशिल्प विकास बोर्ड इन सभी उत्पादों की हाई-क्वालिटी फोटोग्राफी करके उन्हें सीधे सरकारी वेब पोर्टल्स और अमेज़न ग्लोबल जैसे बड़े ऑनलाइन मार्केट्स पर लिस्ट कर रहा है। इस पूरी पारदर्शी और तकनीकी व्यवस्था से नारायणपुर के वनांचल अंचलों में छिपी इस प्राचीन कला का न केवल संरक्षण होगा, बल्कि यह यहाँ के आदिवासी परिवारों के लिए आर्थिक समृद्धि और आत्मनिर्भरता का एक सबसे बड़ा माध्यम बनकर उभरेगी।
Reported By The Hdsmit Universal Hearld Desk

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