छत्तीसगढ़ में मूसलाधार बारिश का भयंकर तांडव; रायपुर जिला प्रशासन ने बुलाई आपातकालीन बैठक, राजधानी सहित कई जिलों में स्कूल बंद
[भारत / छत्तीसगढ़ / रायपुर]
Reported By The Hdsmit Universal Hearld Desk
विस्तृत समाचार:
छत्तीसगढ़ में मानसून की अभूतपूर्व सक्रियता और बंगाल की खाड़ी में बने गहरे अवदाब (डीप डिप्रेशन) के प्रभाव के कारण पिछले 72 घंटों से राज्य के अधिकांश हिस्सों में प्रलयंकारी मूसलाधार बारिश का सिलसिला जारी है। इस मौसमी सिस्टम के कारण राज्य की प्रशासनिक राजधानी रायपुर, औद्योगिक केंद्र दुर्ग, बिलासपुर और जनजातीय बहुल बस्तर संभाग के कई जिलों में जनजीवन पूरी तरह से पंगु हो गया है। लगातार हो रही भारी बारिश के कारण शहरी क्षेत्रों की जल निकासी प्रणाली (ड्रेनेज सिस्टम) पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है, जिससे मुख्य राजमार्ग और अंदरूनी सड़कें तीन से चार फीट तक पानी में डूब गई हैं। रायपुर के निचले रिहायशी इलाकों जैसे अमलीडीह, मोवा, दलदल सिवनी और पुरानी बस्ती के सैकड़ों घरों में नाली और सड़कों का गंदा पानी घुसने की गंभीर खबरें सामने आई हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए रायपुर जिला कलेक्टर ने आधी रात को एक आपातकालीन आपदा प्रबंधन बैठक बुलाई और राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) तथा नगर निगम की टीमों को युद्धस्तर पर जल निकासी और प्रभावित नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के काम में तैनात किया है।
छत्तीसगढ़ में मानसून की अभूतपूर्व सक्रियता और बंगाल की खाड़ी में बने गहरे अवदाब (डीप डिप्रेशन) के प्रभाव के कारण पिछले 72 घंटों से राज्य के अधिकांश हिस्सों में प्रलयंकारी मूसलाधार बारिश का सिलसिला जारी है। इस मौसमी सिस्टम के कारण राज्य की प्रशासनिक राजधानी रायपुर, औद्योगिक केंद्र दुर्ग, बिलासपुर और जनजातीय बहुल बस्तर संभाग के कई जिलों में जनजीवन पूरी तरह से पंगु हो गया है। लगातार हो रही भारी बारिश के कारण शहरी क्षेत्रों की जल निकासी प्रणाली (ड्रेनेज सिस्टम) पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है, जिससे मुख्य राजमार्ग और अंदरूनी सड़कें तीन से चार फीट तक पानी में डूब गई हैं। रायपुर के निचले रिहायशी इलाकों जैसे अमलीडीह, मोवा, दलदल सिवनी और पुरानी बस्ती के सैकड़ों घरों में नाली और सड़कों का गंदा पानी घुसने की गंभीर खबरें सामने आई हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए रायपुर जिला कलेक्टर ने आधी रात को एक आपातकालीन आपदा प्रबंधन बैठक बुलाई और राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) तथा नगर निगम की टीमों को युद्धस्तर पर जल निकासी और प्रभावित नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के काम में तैनात किया है।
शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ते जलस्तर और उफनते नदी-नालों के कारण पैदा हुए सुरक्षा जोखिमों को भांपते हुए प्रशासन ने छात्रों की सुरक्षा के लिए बड़े कदम उठाए हैं। रायपुर, बिलासपुर, सुकमा और कोरबा के जिला कलेक्टरों ने एक सख्त प्रशासनिक आदेश जारी करते हुए सभी शासकीय, अर्ध-शासकीय और निजी प्राथमिक व माध्यमिक स्कूलों में तत्काल प्रभाव से अनिवार्य अवकाश घोषित कर दिया है। स्कूल प्रबंधन समितियों को निर्देशित किया गया है कि वे किसी भी परिस्थिति में छात्रों को स्कूल न बुलाएं और जहां संभव हो, डिजिटल माध्यमों से ऑनलाइन कक्षाओं का संचालन करें। इसके साथ ही, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग और नगर निगम की टीमों को प्रभावित क्षेत्रों में ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव करने, क्लोरीन टैबलेट बांटने और शुद्ध पेयजल टैंकरों की व्यवस्था करने को कहा गया है, ताकि बाढ़ जैसी स्थिति के बाद फैलने वाली संक्रामक बीमारियों जैसे डेंगू, डायरिया और गैस्ट्रोएंटेराइटिस को फैलने से पूरी तरह रोका जा सके।
ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों में स्थिति और भी विकराल रूप ले चुकी है। छत्तीसगढ़ की जीवनदायिनी महानिदेशिका महानदी और खारून नदी अपने उच्चतम बाढ़ स्तर के करीब पहुंच चुकी हैं, जिससे रायपुर और धमतरी के तटीय गांवों में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है। मुख्यमंत्री सचिवालय ने राज्य के पूरे प्रशासनिक अमले को हाई अलर्ट पर रखते हुए एक केंद्रीय नियंत्रण कक्ष (कंट्रोल रूम) स्थापित किया है, जो गंगरेल, हसदेव बांगड़ और मੜਸਿਲੀ जैसे बड़े बांधों के जलस्तर और वहां से छोड़े जा रहे पानी की रीयल-टाइम मॉनिटरिंग कर रहा है। सभी 33 जिलों के कलेक्टरों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे स्थानीय पंचायतों के साथ निरंतर संपर्क बनाए रखें, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पर्याप्त मात्रा में सूखा राशन, जीवन रक्षक दवाएं और तिरपाल की उपलब्धता सुनिश्चित करें, ताकि किसी भी संभावित मानवीय संकट को समय रहते टाला जा सके। प्रशासन ने आम जनता से भी अपील की है कि वे उफनते नदी-नालों, जर्जर पुलों और जलमग्न सड़कों को पार करने का दुस्साहस बिल्कुल न करें।
Reported By The Hdsmit Universal Hearld Desk

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