जशपुर जिले में चाय बागान विकास और कृषि-पर्यटन (एग्रो-टूरिज्म) परियोजना को मिली गति; दार्जिलिंग की तर्ज पर हो रहा उत्पादन

[भारत / छत्तीसगढ़ / जशपुर]
छत्तीसगढ़ के उत्तर-पूर्वी छोर पर स्थित, अपनी विशिष्ट भौगोलिक परिस्थितियों और ठंडी आबोहवा के कारण 'छत्तीसगढ़ का स्विट्जरलैंड' कहे जाने वाले जशपुर जिले में चाय बागानों के विकास, प्रसंस्करण और उसे 'कृषि-पर्यटन' (एग्रो-टूरिज्म) से जोड़ने की एक वृहद सरकारी परियोजना को आज एक नया तकनीकी सत्र शुरू करके तेज कर दिया गया है। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के शीर्ष सॉइल साइंटिस्टों और चाय बागान विशेषज्ञों की सीधी देखरेख में जशपुर के पहाड़ी पाठ क्षेत्रों, विशेषकर पंडਰਾਪਾਠ, बगीचा और सन्ना के ऊंचे पठारों पर चाय की खेती के रकबे को दोगुना करने का काम शुरू किया गया है। जशपुर की मिट्टी में अम्लीयता (एसिडिटी) का स्तर और यहाँ का ठंडा तापमान असम और दार्जिलिंग के पहाड़ी इलाकों से काफी मिलता-जुलता है, जिसके कारण यहाँ उत्पादित होने वाली हरी और काली चाय की पत्तियों की सुगंध और स्वाद को अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने बेहद उच्च कोटि का पाया है।
जशपुर के इन सुरम्य चाय बागानों में काम करने वाले स्थानीय पहाड़ी कोरवा और अन्य आदिवासियों की आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए जिला प्रशासन ने चाय की पत्तियों के प्रसंस्करण के लिए कवर्धा और सरगुजा की तर्ज पर एक अत्याधुनिक 'टी प्रोसेसिंग एंड पैकेजिंग यूनिट' को अपग्रेड किया है। इस नई यूनिट में आधुनिक मशीनों की मदद से पत्तियों की ग्रेडिंग, सुखाने (ड्राइंग) और वैक्यूम पैकेजिंग का काम पूरी तरह से स्वचालित तरीके से किया जाएगा, जिससे 'जशपुर टी' (Jashpur Tea) की ब्रांडिंग देश के बड़े मेट्रो शहरों और दिल्ली-मुंबई के प्रीमियम ऑर्गेनिक स्टोर्स में की जा ਰਹੀ है। इससे न केवल स्थानीय आदिवासियों को उनके गांव में ही साल भर का स्थायी रोजगार मिला है, बल्कि उनकी दैनिक मजदूरी दरों में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
इस परियोजना का दूसरा और सबसे आकर्षक पहलू इसे 'एग्रो-टूरिज्म' के एक बड़े हब के रूप में विकसित करना है। जशपुर जिला प्रशासन वन विभाग और पर्यटन मंडल के सहयोग से इन हरे-भरे चाय बागानों के बीचों-बीच सुंदर लकड़ी के मचान, व्यू-पॉइंट्स और वॉकिंग ट्रेल्स का निर्माण कर रहा है। यहाँ आने वाले पर्यटक न केवल चाय बागानों के खूबसूरत नजारों का आनंद ले सकेंगे, बल्कि वे स्वयं अपने हाथों से चाय की पत्तियां तोड़ने की पारंपरिक रस्म में भाग ले सकेंगे और प्रोसेसिंग यूनिट में जाकर चाय बनने की पूरी लाइव प्रक्रिया को देख सकेंगे। बागानों के पास ही एक सर्वसुविधायुक्त 'टी टेस्टिंग लाउंज' भी बनाया गया है, जहाँ पर्यटक विभिन्न प्रकार की ताज़ा जशपुर चाय का स्वाद ले सकेंगे। प्रशासन का मानना है कि इस अनूठी परियोजना से जशपुर में पर्यावरण-अनुकूल पर्यटन को भारी बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय युवाओं के लिए गाइड, होम-स्टे और टैक्सी संचालन के रूप में स्वरोजगार के सैकड़ों नए अवसर खुलेंगे।

Reported By The Hdsmit Universal Hearld Desk

 

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