बिलासपुर रेल मंडल ने मंड-रायगढ़ रेल कॉरिडोर परियोजना के निर्माण कार्य में लाई तेजी; कोयला परिवहन और यात्री ट्रेनों को मिलेगी बड़ी राहत
[भारत / छत्तीसगढ़ / बिलासपुर]
विस्तृत समाचार:
दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) के अंतर्गत आने वाले बिलासपुर रेल मंडल ने छत्तीसगढ़ रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड के साथ मिलकर राज्य के खनिज समृद्ध क्षेत्रों के विकास के लिए एक बहुत बड़े ड्रीम प्रोजेक्ट 'मंड-रायगढ़ रेल कॉरिडोर' के विस्तार और दोहरीकरण कार्य को युद्धस्तर पर तेज कर दिया है। इस मल्टी-करोड़ मेगा-इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य रायगढ़ और धरਮजयगढ़ के कोयला समृद्ध खनन क्षेत्रों को सीधे देश के मुख्य राष्ट्रीय रेलवे ग्रिड से जोड़ना है। रेलवे के वरिष्ठ इंजीनियरों द्वारा साझा किए गए तकनीकी विवरणों के अनुसार, इस नए रेल कॉरिडोर में अत्यधिक उन्नत भारी-ढुलाई (हैवी-हॉल) ब्रॉड-गेज ट्रैक बिछाए जा रहे हैं, जिन्हें अत्याधुनिक स्वचालित इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिग्नलिंग सिस्टम और 'कवच' सुरक्षा तकनीक से लैस किया जा रहा है, ताकि मालगाड़ियों के परिवहन की गति को दोगुना किया जा सके और इस व्यस्त मार्ग पर चलने वाली यात्री ट्रेनों के समय-सारणी प्रबंधन में सुधार हो सके।
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दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) के अंतर्गत आने वाले बिलासपुर रेल मंडल ने छत्तीसगढ़ रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड के साथ मिलकर राज्य के खनिज समृद्ध क्षेत्रों के विकास के लिए एक बहुत बड़े ड्रीम प्रोजेक्ट 'मंड-रायगढ़ रेल कॉरिडोर' के विस्तार और दोहरीकरण कार्य को युद्धस्तर पर तेज कर दिया है। इस मल्टी-करोड़ मेगा-इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य रायगढ़ और धरਮजयगढ़ के कोयला समृद्ध खनन क्षेत्रों को सीधे देश के मुख्य राष्ट्रीय रेलवे ग्रिड से जोड़ना है। रेलवे के वरिष्ठ इंजीनियरों द्वारा साझा किए गए तकनीकी विवरणों के अनुसार, इस नए रेल कॉरिडोर में अत्यधिक उन्नत भारी-ढुलाई (हैवी-हॉल) ब्रॉड-गेज ट्रैक बिछाए जा रहे हैं, जिन्हें अत्याधुनिक स्वचालित इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिग्नलिंग सिस्टम और 'कवच' सुरक्षा तकनीक से लैस किया जा रहा है, ताकि मालगाड़ियों के परिवहन की गति को दोगुना किया जा सके और इस व्यस्त मार्ग पर चलने वाली यात्री ट्रेनों के समय-सारणी प्रबंधन में सुधार हो सके।
इस रणनीतिक रेल कॉरिडोर का तेजी से निर्माण होना देश की आंतरिक ऊर्जा सुरक्षा और बिजली उत्पादन के दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत के विभिन्न राज्यों में स्थित थर्मल पावर प्लांटों को अपनी बिजली उत्पादन क्षमता बनाए रखने के लिए उच्च गुणवत्ता वाले कोयले की निरंतर आपूर्ति की आवश्यकता होती है। मांड-रायगढ़ कॉरिडोर को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि यह भारी एक्सल-लोड वाली मालगाड़ियों के संचालन को पूरी तरह से सपोर्ट कर सके, जिससे कोयला खनन कंपनियां अपने उत्पादन को सीधे खदान के मुहाने से देश के किसी भी हिस्से में न्यूनतम समय और बेहद कम लॉजिस्टिक लागत पर भेज सकेंगी। रेलवे बोर्ड ने पुष्टि की है कि बारिश के मौसम के बावजूद मिट्टी के समतलीकरण, पुलों के निर्माण और पटरियों के सुदृढ़ीकरण का काम चौबीसों घंटे की शिफ्टों में चलाया जा रहा है ताकि आगामी सर्दियों के सीजन से पहले इस रूट को पूरी तरह चालू किया जा सके।
परियोजना के निर्माण के दौरान पर्यावरण संरक्षण और जैव-विविधता का भी विशेष ध्यान रखा जा रहा है, क्योंकि इस रेल लाइन का एक बड़ा हिस्सा घने जंगलों और संवेदनशील हाथी कॉरिडोर से होकर गुजरता है। रेलवे ने राज्य के वन विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर रायगढ़-धरमजयगढ़ के जंगलों में तीन विशेष बड़े वन्यजीव अंडरपास और 'इको-ब्रिज' का निर्माण किया है। इन अंडरपासों में मोशन-एक्टिवेटेड इंफ्रारेड सेंसर और नाइट-विज़न कैमरे लगाए गए हैं, जो हाथियों और अन्य जंगली जानवरों के झुंड की आवाजाही को ट्रैक करेंगे और ट्रैक के पास वन्यजीवों की उपस्थिति होने पर आने वाली ट्रेनों के लोको-पायलटों को स्वचालित रूप से अलार्म सिग्नल भेजकर ट्रेन की गति कम कर देंगे। इस आधुनिक और पर्यावरण-हितैषी इंफ्रास्ट्रक्चर मॉडल की राष्ट्रीय विकास पैनलों ने काफी सराहना की है, जिससे छत्तीसगढ़ देश में टिकाऊ और आधुनिक रेलवे लॉजिस्टिक्स का एक प्रमुख केंद्र बनकर उभर रहा है।
Reported By The Hdsmit Universal Hearld Desk

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