बिलासपुर सिम्स (RIMS) ने फेफड़ों की गंभीर बीमारियों का जल्द पता लगाने के लिए उन्नत नॉन-इनवेसिव डायग्नोस्टिक प्रोटोकॉल को दी मंजूरी

 मध्य भारत में सार्वजनिक नैदानिक प्रथाओं (clinical practices) को पूरी तरह से आधुनिक बनाने की दिशा में, बिलासपुर क्षेत्रीय चिकित्सा विज्ञान संस्थान (RIMS) के शोधकर्ताओं ने एक अत्यंत सटीक, नॉन-इनवेसिव (गैर-आक्रामक) श्वसन स्क्रीनिंग वेक्टर के सफल नैदानिक सत्यापन (clinical validation) की घोषणा की है। प्रमुख जैव प्रौद्योगिकी प्रयोगशालाओं के सहयोग से विकसित यह नवोन्मेषी डायग्नोस्टिक प्लेटफॉर्म मरीज के सांस चक्र के कुछ ही मिनटों के भीतर जटिल फुफ्फुसीय रोगजनकों (pulmonary pathogens) से जुड़े विशिष्ट वाष्पशील कार्बनिक यौगिकों (VOCs) की पहचान करने के लिए उन्नत गैस क्रोमैटोग्राफी का उपयोग करता है। एक व्यापक बहु-अस्पताल परीक्षण का सफल समापन आपातकालीन क्लीनिकों को पारंपरिक प्रयोगशाला संस्कृतियों (lab cultures) का एक तीव्र विकल्प प्रदान करता है।

इस नॉन-इनवेसिव प्लेटफॉर्म का चिकित्सीय प्रभाव बहुत बड़ा है, विशेष रूप से राज्य के औद्योगिक क्षेत्रों में बढ़ते फेफड़ों के रोगों (pulmonary conditions) के मद्देनजर। दशकों से डॉक्टरों को नैदानिक बाधाओं का सामना करना पड़ता था, जिससे प्रयोगशाला पुष्टि की प्रतीक्षा करते समय जेनेरिक उपचार देना पड़ता था—एक ऐसी व्यवस्था जो रिकवरी में देरी करती थी और चिकित्सा लागत को बढ़ाती थी। यह नवनिर्मित आणविक प्रोफाइलिंग टूल तत्काल रोगज़नक़ की पहचान करने में सक्षम बनाता है, जिससे विशेषज्ञ मरीज के भर्ती होने के पहले घंटे से ही सटीक उपचार शुरू कर सकते हैं। अस्पताल प्रशासन ने पुष्टि की है कि इस तकनीक को अब सार्वजनिक स्वास्थ्य आउटरीच नेटवर्क में एकीकृत किया जा रहा है, जिससे बिलासपुर संभाग में हाशिए पर रहने वाले ग्रामीण समुदायों तक उन्नत स्वास्थ्य सेवा आसानी से सुलभ हो सकेगी।
CHHATTISGARH, BILASPUR
Reported by The HDSMIT Universal Herald

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