रायगढ़ के केलो नदी संरक्षण प्रोजेक्ट में भारी कोताही, एनजीटी ने राज्य सरकार को जारी किया सख्त नोटिस

[भारत / छत्तीसगढ़ / रायगढ़] - उद्योगधानी रायगढ़ शहर की जीवनदायिनी मानी जाने वाली 'केलो नदी' के संरक्षण, सफाई और उसके जल ग्रहण क्षेत्रों (कैचमेंट एरिया) के पुनरुद्धार के लिए स्वीकृत करोड़ों रुपये के प्रोजेक्ट में बरती जा रही गंभीर प्रशासनिक लापरवाही का मामला अब देश की सबसे बड़ी पर्यावरण अदालत यानी राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के पास पहुंच गया है। स्थानीय पर्यावरणविदों और नागरिक अधिकार संगठनों द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए, एनजीटी (National Green Tribunal) की केंद्रीय पीठ ने छत्तीसगढ़ सरकार के पर्यावरण मंत्रालय, रायगढ़ कलेक्टर और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को एक बेहद सख्त कारण बताओ नोटिस जारी किया है। याचिका में सैटेलाइट तस्वीरों और वॉटर क्वालिटी रिपोर्ट्स के पुख्ता सबूतों के साथ यह दिखाया गया है कि रायगढ़ के उद्योगों और शहर का गंदा सीवरेज पानी बिना किसी ट्रीटमेंट के सीधे केलो नदी में बहाया जा रहा है, जिससे नदी का अस्तित्व पूरी तरह से खतरे में पड़ गया है।

केलो नदी के इस प्रदूषण के कारण रायगढ़ शहर और उसके निचले तटीय गांवों में रहने वाली एक बड़ी आबादी गंभीर स्वास्थ्य संकट का सामना कर रही है। भूजल स्तर के दूषित होने की वजह से पीने के पानी में भारी धातुओं (जैसे लेड और आर्सेनिक) की मात्रा निर्धारित मानकों से कई गुना अधिक पाई गई है, जिससे स्थानीय लोगों में किडनी, लिवर और त्वचा से जुड़ी बीमारियों के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। एनजीटी ने अपनी टिप्पणी में कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि नदी संरक्षण के नाम पर पिछले तीन वर्षों में जो बजट जारी किया गया था, उसका उपयोग जमीनी स्तर पर नदी की सफाई करने के बजाय सिर्फ कागजी बैठकों और कंसल्टेंसी फीस पर खर्च कर दिया गया। अदालत ने एक स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति का गठन किया है जो अगले दो हफ्तों के भीतर रायगढ़ का दौरा कर केलो नदी के प्रदूषण की वास्तविक स्थिति की जांच करेगी और अपनी रिपोर्ट सीधे ट्रिब्यूनल को सौंपेगी।
इस कानूनी सख्ती के बाद रायगढ़ जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया है। कलेक्टर ने आनन-फानन में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और नगर निगम के अधिकारियों की एक आपातकालीन बैठक बुलाई है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे नदी किनारे स्थित उन सभी स्पंज आयरन, कोल वाशरी और उद्योगों की सूची तैयार करें जो नियमों का उल्लंघन कर अपना औद्योगिक कचरा नदी में डंप कर रहे हैं। प्रशासन ने शहर के मुख्य नालों पर तत्काल अस्थाई बायो-फिल्टर लगाने और बंद पड़े सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) को युद्धस्तर पर चालू करने के आदेश दिए हैं। रायगढ़ के प्रबुद्ध नागरिकों का कहना है कि केलो नदी सिर्फ एक जलस्रोत नहीं है, बल्कि यह रायगढ़ की सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान का हिस्सा है। यदि समय रहते इसके संरक्षण के लिए कड़े और ईमानदार कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाली पीढ़ियों को इसके बेहद भयानक परिणाम भुगतने होंगे।

Reported By The Hdsmit Universal Hearld Desk 

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