छत्तीसगढ़ विधानसभा में विधायी कामकाज की भारी सरगर्मी: विपक्ष के वॉकआउट के बीच निजी विश्वविद्यालय और भाड़ा नियंत्रण समेत चार बड़े संशोधन विधेयक ध्वनि मत से पारित

 CHHATTISGARH, RAIPUR

Reported by The HDSMIT Universal Herald
छत्तीसगढ़ विधानसभा के वर्तमान सत्र के दौरान आज विधायी और विधिसम्मत कामकाज में अभूतपूर्व सरगर्मी और राजनीतिक सरगर्मियां देखने को मिलीं। विधानसभा अध्यक्ष की अध्यक्षता में शुरू हुई सदन की कार्यवाही के दौरान, मुख्य विपक्षी दल के सदस्यों ने विभिन्न प्रशासनिक और राजनीतिक मुद्दों पर मंत्रियों के जवाब से असंतोष व्यक्त करते हुए और भारी नारेबाजी के बीच सदन से वॉकआउट (out of the house) कर दिया। विपक्ष की अनुपस्थिति के बावजूद, सत्तारूढ़ दल ने विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाते हुए जनता और राज्य के विकास से जुड़े चार अत्यंत महत्वपूर्ण और दूरगामी संशोधन विधेयकों को सदन के पटल पर विस्तार से चर्चा के बाद ध्वनि मत से सर्वसम्मति से पारित कर दिया।
संसदीय कार्य विभाग और विधानसभा सचिवालय से प्राप्त आधिकारिक विधायी विवरणों के अनुसार, आज सदन की कार्यसूची में कुल सात प्रमुख संशोधनों और कानूनी प्रस्तावों को विचार-विमर्श के लिए शामिल किया गया था। इनमें से चार महत्वपूर्ण विधेयकों को आज ही अंतिम रूप से पारित कर दिया गया, जबकि शेष तीन विधेयकों को आगामी सत्रों में और अधिक विस्तृत चर्चा के उद्देश्य से पटल पर पुनर्स्थापित (re-introduced) किया गया है। आज पारित किए गए प्रमुख कानूनों में "छत्तीसगढ़ भाड़ा नियंत्रण (संशोधन) विधेयक", "छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय (स्थापना और संचालन) संशोधन विधेयक" और वाणिज्यिक कर विभाग से जुड़े मूल्य संवर्धित कर (VAT) व माल एवं सेवा कर (GST) के सरलीकरण से संबंधित महत्वपूर्ण वित्तीय संशोधन विधेयक शामिल हैं।
इन कानूनों के पारित होने के बाद राज्य के उच्च शिक्षा क्षेत्र में निजी विश्वविद्यालयों के शैक्षणिक स्तर, बुनियादी ढांचे और प्रशासनिक नियमों की निगरानी को और अधिक मजबूत और पारदर्शी बनाया जा सकेगा, जिससे छात्रों के हितों की रक्षा होगी। इसके साथ ही, किरायेदारी से जुड़े विवादों के त्वरित और समयबद्ध निपटारे के लिए भाड़ा नियंत्रण अधिकरणों (Rent Control Tribunals) को और अधिक कानूनी शक्तियां प्रदान की गई हैं, जिससे मकान मालिकों और किरायेदारों के बीच के न्यायिक मामलों का निपटारा जल्द हो सकेगा। संसदीय कार्य मंत्री ने सदन को बताया कि विपक्ष को रचनात्मक चर्चा में भाग लेना चाहिए था, लेकिन उनके वॉकआउट के बावजूद जनता के हित से जुड़े इन जरूरी आर्थिक और प्रशासनिक सुधारों को रोकना उचित नहीं था, इसलिए सरकार ने इन्हें तय प्रक्रिया के तहत पारित कराया है।

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