बस्तर संभाग में 'कलागुड़ी' परियोजना का वैश्विक विस्तार: आदिवासी धोकरा कला और काष्ठ शिल्प को मिलेगा अंतरराष्ट्रीय ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म

 

[Jagdalpur, Chhattisgarh, India] बस्तर अंचल की सदियों पुरानी पारंपरिक जनजातीय कला, विशेषकर बेल मेटल (धोकरा शिल्प), लौह शिल्प और दुर्लभ काष्ठ कलाकृतियों को सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्थापित करने के लिए जगदलपुर जिला प्रशासन ने 'बस्तर कलागुड़ी मिशन 2.0' का आधिकारिक शुभारंभ किया है। इस विशेष आर्थिक एवं सांस्कृतिक पहल के अंतर्गत जगदलपुर और आसपास के ग्रामीण अंचलों के लगभग 2,500 से अधिक स्थानीय आदिवासी दस्तकारों और शिल्पकारों को एक संगठित सहकारी नेटवर्क से जोड़ा जा रहा है। परियोजना के तहत नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन (NID) और राष्ट्रीय फैशन प्रौद्योगिकी संस्थान (NIFT) के वरिष्ठ डिजाइनरों को बस्तर में आमंत्रित किया गया है, जो स्थानीय कारीगरों को उनकी पारंपरिक पहचान को सुरक्षित रखते हुए समकालीन डिजाइनिंग, बेहतर पैकेजिंग और हाई-एंड फिनिशिंग की तकनीकी बारीकियां सिखाएंगे। जिला प्रशासन ने वैश्विक स्तर पर पहुंच बनाने के लिए प्रमुख अंतरराष्ट्रीय ई-कॉमर्स कंपनियों और निर्यात पोर्टल्स के साथ औपचारिक समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं, जिससे इन हस्तनिर्मित कलाकृतियों को बिना किसी बिचौलिए के सीधे अमेरिका, यूरोप और खाड़ी देशों के बाजारों में बेचा जा सकेगा। बिक्री से मिलने वाला 90% शुद्ध वित्तीय लाभ सीधे कारीगरों के व्यक्तिगत बैंक खातों में ट्रांसफर किया जाएगा। इसके साथ ही, जगदलपुर में एक अत्याधुनिक शिल्प परीक्षण प्रयोगशाला और डिजिटल फोटोग्राफी स्टूडियो भी स्थापित किया जा रहा है, जहां प्रत्येक उत्पाद की शुद्धता और जीआई-टैग (Geographical Indication) का आधिकारिक प्रमाणन किया जाएगा, जिससे बस्तर की सांस्कृतिक धरोहर को वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान और ग्रामीण परिवारों को स्थायी आजीविका मिल सकेगी।
Reported By: the hdsmit universal desk


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