नागपुर के गोरेवाड़ा अंतरराष्ट्रीय चिड़ियाघर में दो नए रॉयल बंगाल टाइगर शावकों का जन्म, पर्यटकों में उत्साह

 [भारत / महाराष्ट्र / नागपुर] - उपराजधानी नागपुर में स्थित एशिया के सबसे बड़े सफारी पार्कों में से एक, 'बालासाहेब ठाकरे गोरेवाड़ा अंतर्राष्ट्रीय चिड़ियाघर और सफारी' परिसर से वन्यजीव प्रेमियों और पर्यावरणविदों के लिए एक बेहद सुखद और गौरवान्वित करने वाली खबर सामने आई है। चिड़ियाघर प्रबंधन के वन्यजीव डॉक्टरों की विशेष देखरेख में यहाँ की एक सात वर्षीय रॉयल बंगाल बाघिन 'करिश्मा' ने दो स्वस्थ शावकों को जन्म दिया है। विदर्भ क्षेत्र को 'टाइगर कैपिटल ऑफ इंडिया' के रूप में जाना जाता है, और गोरेवाड़ा सफारी में नए शावकों का आगमन राज्य के बाघ संरक्षण कार्यक्रम की एक बहुत बड़ी सफलता माना जा रहा है। चिड़ियाघर के मुख्य वन संरक्षक ने बताया कि दोनों शावक और बाघिन पूरी तरह से स्वस्थ हैं, लेकिन सुरक्षा और संक्रमण के खतरों को देखते हुए उन्हें वर्तमान में एक विशेष रूप से निर्मित सीसीटीवी-सज्जित डार्क बाड़े (क्वारंटाइन जोन) में आइसोलेशन में रखा गया है, जहां मेडिकल टीम चौबीसों घंटे उनकी शारीरिक गतिविधियों और स्तनपान के पैटर्न पर पैनी नजर रख रही है।

बाघिन और शावकों की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए खूंखार और भारी आवाजों वाले सफारी वाहनों के मार्ग को कुछ दिनों के लिए इस बाड़े से दूर डायवर्ट कर दिया गया है। डॉक्टरों के अनुसार, आगामी तीन महीनों तक शावकों को केवल मां के दूध पर निर्भर रखा जाएगा और वन्यजीव विशेषज्ञों की मंजूरी मिलने के बाद ही उन्हें आम पर्यटकों के दीदार के लिए मुख्य ओपन सफारी क्षेत्र में छोड़ा जाएगा। इस बीच, नागपुर और दूर-दराज के क्षेत्रों से आने वाले पर्यटकों और बच्चों के बीच इन नए शावकों के नामकरण को लेकर भारी उत्साह देखा जा रहा है। चिड़ियाघर प्रशासन ने सोशल मीडिया के माध्यम से एक सार्वजनिक प्रतियोगिता शुरू करने का निर्णय लिया है, जिसमें आम जनता से इन शावकों के लिए सुंदर और सांस्कृतिक नामों के सुझाव मांगे जाएंगे। इस ऐतिहासिक और प्राकृतिक घटना से गोरेवाड़ा चिड़ियाघर में न केवल जैव-विविधता मजबूत होगी, बल्कि आने वाले विंटर टूरिज्म सीजन के दौरान विदर्भ में वन्यजीव पर्यटन और स्थानीय रोजगार को एक बहुत बड़ा बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
Reported By The Hdsmit Universal Hearld Desk

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