महासमुंद में भारी बारिश से उपजे जलभराव संकट पर तत्काल प्रशासनिक एक्शन: किसानों के विरोध के बाद तहसीलदार ने जेसीबी मशीनों से साफ कराया ड्रेनेज सिस्टम

CHHATTISGARH, MAHASAMUND
Reported by The HDSMIT Universal Herald
छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले और उससे सटे मैदानी व तराई अंचलों में पिछले कई दिनों से हो रही मूसलाधार और अनवरत मानसूनी बारिश के कारण ग्रामीण जनजीवन और कृषि व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हुई है। जिले के तुमाडबरी और उसके समीपवर्ती ग्रामीण इलाकों में स्थिति तब बेहद तनावपूर्ण हो गई जब लगभग 50 एकड़ से अधिक उपजाऊ कृषि भूमि और उसमें लगी खड़ी धान की फसलें लगातार हो रही बारिश और जलभराव के कारण पूरी तरह से पानी में डूब गईं। खेतों में पिछले एक सप्ताह से अधिक समय से घुटनों तक पानी जमा रहने के कारण नई फसलें सड़ने की कगार पर पहुंच गई थीं, जिससे आक्रोशित और आर्थिक नुकसान झेल रहे सैकड़ों स्थानीय किसान सड़कों पर उतर आए और मुख्य मार्ग पर चक्का जाम कर उग्र विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।
किसानों के इस अचानक और बड़े आंदोलन की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया। कलेक्टर के निर्देश पर स्थानीय तहसीलदार, जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ इंजीनियर और सिंचाई विभाग के अधिकारी तुरंत भारी पुलिस बल और आपदा राहत दलों के साथ मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने आंदोलनकारी किसानों से सीधे बातचीत की और उनकी समस्याओं को सुना। किसानों ने आरोप लगाया कि क्षेत्र में कुछ रसूखदार लोगों द्वारा किए गए अवैध निर्माण और मुख्य जल निकासी नाले (main drainage canal) की नियमित सफाई न होने के कारण उनके खेतों से पानी बाहर नहीं निकल पा रहा है, जिससे उनकी पूरे साल की मेहनत पर पानी फिरने की स्थिति पैदा हो गई है।
स्थिति की गंभीरता और किसानों के आक्रोश को देखते हुए तहसीलदार ने बिना कोई समय गंवाए तत्काल मौके पर ही कई भारी जेसीबी (JCB) मशीनों, पोकलेन और ड्रेनेज एक्सपर्ट्स की टीमों को तैनात कर दिया। अधिकारियों की देखरेख में युद्ध स्तर पर कार्रवाई करते हुए प्राकृतिक जल प्रवाह को बाधित करने वाले अवैध बांधों, मलबे और अवरुद्ध ड्रेनेज सिस्टम को पूरी तरह से साफ कराया गया। ड्रेनेज खुलने के महज कुछ ही घंटों के भीतर खेतों से पानी का स्तर तेजी से कम होने लगा, जिसके बाद संतुष्ट होकर किसानों ने अपना चक्का जाम और आंदोलन समाप्त किया। जिला प्रशासन ने राजस्व अधिकारियों को तत्काल निर्देश जारी किए हैं कि वे प्रभावित गांवों का स्थलीय दौरा कर बाढ़ और अत्यधिक वर्षा से फसलों को हुए वास्तविक नुकसान का एक पारदर्शी व विस्तृत गिरदावरी सर्वेक्षण तैयार करें, ताकि राजस्व पुस्तक परिपत्र (RBC 6-4) के कड़े नियमों के तहत पीड़ित किसानों को जल्द से जल्द उचित वित्तीय मुआवजा राशि स्वीकृत की जा सके। 

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