पारंपरिक स्वदेशी कृषि पद्धतियों और अन्नदाताओं के सम्मान में अनूठी मिसाल: महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने खेतों में स्वयं हल चलाकर किया खरीफ सत्र का आगाज

 MAHARASHTRA, NAGPUR

Reported by The HDSMIT Universal Herald
महाराष्ट्र के ग्रामीण और कृषि प्रधान अंचलों में मानसूनी बारिश के आगमन के साथ ही खेती-किसानी की गतिविधियों ने पूरे शबाब पर ज़ोर पकड़ लिया है। इस बीच, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री का एक बेहद सादगी भरा, मिट्टी से जुड़ा और पारंपरिक किसानी अंदाज़ इन दिनों पूरे प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भारी चर्चा और सराहना का विषय बना हुआ है। मुख्यमंत्री ने वीआईपी प्रोटोकॉल और औपचारिकताओं को किनारे रखकर नागपुर और अमरावती जिलों के समीपवर्ती ग्रामीण क्षेत्रों का आकस्मिक दौरा किया। वे सीधे महाराष्ट्र के खेतों में उतरे, जहाँ उन्होंने न केवल पारंपरिक रूप से भूमि-पूजन किया बल्कि खुद अपने हाथों में लकड़ी के हल की मूठ थामी और बैलों की जोड़ी के साथ खेत जोतकर महाराष्ट्र के लाखों किसानों का हौसला बढ़ाया और खरीफ सीजन की कृषि गतिविधियों का औपचारिक शुभारंभ किया।
मुख्यमंत्री के इस ठेठ जमीनी और स्वदेशी अंदाज़ को देखकर खेतों में काम कर रहे महाराष्ट्र के स्थानीय किसान और श्रमिक बेहद भावुक और उत्साहित नज़र आए। ग्रामीणों का कहना है कि राज्य के इतिहास में यह पहली बार है जब किसी मुख्यमंत्री ने इस प्रकार सीधे कीचड़ और पानी से भरे खेतों में उतरकर पसीना बहाया है, जो महाराष्ट्र की समृद्ध कृषि संस्कृति और माटी के प्रति उनके गहरे जुड़वा और सम्मान को प्रदर्शित करता है। खेत जोतने के बाद मुख्यमंत्री ने वहीं पास के एक पेड़ की छांव में महाराष्ट्र के किसानों के साथ पारंपरिक चौपाल लगाई और उनके सुख-दुख साझा किए। उन्होंने किसानों को आश्वस्त किया कि उनकी सरकार कृषि को घाटे के सौदे से उबारकर लाभप्रद बनाने के लिए हर संभव नीतिगत प्रयास कर रही है।
इस चौपाल के दौरान मुख्यमंत्री ने कृषि और राजस्व विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि महाराष्ट्र सरकार की महात्वाकांक्षी कृषक कल्याण योजनाओं के तहत धान, कपास और सोयाबीन उत्पादक किसानों को मिलने वाली इनपुट सब्सिडी और प्रति क्विंटल बोनस की राशि बिना किसी तकनीकी व्यवधान के सीधे और समय पर उनके बैंक खातों में ट्रांसफर (DBT) की जाए। महाराष्ट्र के कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि इस वर्ष राज्य भर में उन्नत और प्रमाणित किस्म के बीजों, जैविक खादों और रासायनिक उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए जिला स्तर पर विशेष निगरानी दल गठित किए गए हैं, ताकि महाराष्ट्र के सुदूर अंचलों के छोटे किसानों को सोसायटियों में किसी भी प्रकार की किल्लत या कतारों का सामना न करना पड़े।

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