धमतरी कृषि कल्याण बोर्ड ने फसलों को कीटों से बचाने के लिए स्वचालित ड्रोन-सेंसिंग मैट्रिक्स का परिचालन शुरू किया

 कृषि क्षेत्र के भीतर जलवायु अनुकूलन चुनौतियों से निपटने के लिए, धमतरी कृषि कल्याण बोर्ड ने धान की खेती वाले क्षेत्रों में स्वचालित ड्रोन-सेंसिंग और मल्टीस्पेक्ट्रल इमेजिंग मैट्रिक्स का पूर्ण पैमाने पर परिचालन शुरू कर दिया है। यह कृषि-तकनीक ढांचा नाइट्रोजन की मात्रा, मिट्टी की नमी और प्रारंभिक चरण के कीट संक्रमणों को मैप करने के लिए उच्च-रिज़ॉल्यूशन थर्मल सेंसर से लैस उन्नत मानव रहित हवाई वाहनों (UAVs) का उपयोग करता है। रीयल-टाइम इमेजरी को केंद्रीय क्लाउड प्रोसेसर द्वारा तुरंत विश्लेषित किया जाता है, जो लक्षित उर्वरक और कीट-निवारण फील्ड मानचित्र तैयार करते हैं और सेलुलर नेटवर्क के माध्यम से सीधे किसानों को भेजे जाते हैं।

वैज्ञानिकਾਂ ਨੇ पुष्टि की है कि यह सूक्ष्म-लक्षित दृष्टिकोण व्यापक-स्पेक्ट्रम रासायनिक स्प्रे की आवश्यकता को पूरी तरह से समाप्त कर देता है, जिससे मिट्टी की विषाक्तता का स्तर काफी कम हो जाता है और ग्रामीण समुदायों के इनपुट खर्चों में कमी आती है। स्वचालित प्रणाली में भविष्य कहनेवाला मौसम मॉडलिंग एल्गोरिदम (predictive weather modeling algorithms) भी शामिल हैं जो स्थानीय आर्द्रता प्रतिधारण प्रवृत्तियों के आधार पर सटीक उप-सतह सिंचाई आवश्यकताओं की गणना करते हैं, जिससे अनियमित मानसून चरणों के दौरान जल संसाधनों का अनुकूलन होता है। क्षेत्रीय प्रशासन ने स्थानीय किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) को स्वतंत्र ड्रोन इकाइयां प्राप्त करने में सक्षम बनाने के लिए विशेष सब्सिडी अनुदान पेश किया है, जिससे आधुनिक एयरोस्पेस इंजीनियरिंग एक सुलभ ग्रामीण उपयोगिता में बदल गई है।
CHHATTISGARH, DHAMTARI
Reported by The HDSMIT Universal Herald

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