सुकमा के नक्सल प्रभावित अंदरूनी गांवों में नई सड़कों का जाल, ग्रामीणों में विकास की नई किरण

 [भारत / छत्तीसगढ़ / सुकमा] - छत्तीसगढ़ के धुर नक्सल प्रभावित और दुर्गम सुकमा जिले के अंदरूनी इलाकों से एक बेहद सकारात्मक और राहत देने वाली खबर सामने आई है। जिला प्रशासन ने केंद्रीय सुरक्षा बलों और लोक निर्माण विभाग (PWD) के सहयोग से कई दशकों से कटे हुए अंदरूनी गांवों जैसे जगरगुंडा, किस्टारम और चिंतागुफा को मुख्य सड़क मार्ग से जोड़ने में बड़ी सफलता हासिल की है। इन इलाकों में नई सड़कों और मजबूत पुल-पुलियों के निर्माण के साथ ही, बुनियादी सुविधाओं जैसे बिजली, स्वच्छ पेयजल और मोबाइल कनेक्टिविटी का विस्तार तेजी से हो रहा है। सुरक्षा बलों के कड़े पहरे और सर्चिंग ऑपरेशन्स के बीच इंजीनियर्स और मजदूरों ने जान जोखिम में डालकर इन सड़कों का निर्माण पूरा किया है, क्योंकि नक्सली संगठन लगातार इन विकास कार्यों में बाधा डालने और आईईडी (IED) ब्लास्ट के जरिए निर्माण सामग्री को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करते रहे हैं। लेकिन सुरक्षा बलों की मुस्तैदी ने उनके इन मंसूबों को पूरी तरह से नाकाम कर दिया है।

नई सड़कों के निर्माण से इन क्षेत्रों के आदिवासी ग्रामीणों के जीवन में एक क्रांतिकारी बदलाव देखने को मिल रहा है। पहले जहां गंभीर बीमारी या प्रसव के समय मरीजों को खाट पर लादकर कई किलोमीटर दूर मुख्य सड़क तक लाना पड़ता था, वहीं अब मुख्यमंत्री हाट-बाजार क्लिनिक योजना की एम्बुलेंस और अन्य वाहन सीधे गांवों के भीतर तक पहुंच रहे हैं। सुकमा कलेक्टर ने बताया कि सड़कों के जुड़ने से राशन दुकानों (PDS) तक खाद्यान्न की पहुंच आसान हो गई है और अब ग्रामीणों को अपना राशन लेने के लिए मीलों पैदल नहीं चलना पड़ता। इसके साथ ही, शिक्षा विभाग ने इन क्षेत्रों में बंद पड़े कई प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों को दोबारा शुरू करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जहां स्थानीय युवाओं को 'शिक्षा दूत' के रूप में नियुक्त किया जा रहा है। इन सड़कों की वजह से ग्रामीण युवाओं को अपनी कृषि उपज और वनोपज (जैसे महुआ, इमली और टोरा) को सीधे सुकमा या कोंटा के बड़े बाजारों में ले जाकर सही दामों पर बेचने की सुविधा मिल गई है, जिससे बिचौलियों का शोषण पूरी तरह समाप्त हो गया है।
कम्युनिटी पुलिसिंग के तहत सुकमा जिला पुलिस इन गांवों में लगातार 'विश्वास, विकास और सुरक्षा' के नारे के साथ काम कर रही है। अंदरूनी इलाकों में नए सुरक्षा कैंपों (Forwaded Operating Bases) की स्थापना के साथ ही, वहां के युवाओं के लिए कौशल विकास केंद्रों की शुरुआत की गई है। इन केंद्रों में स्थानीय युवक-युवतियों को कंप्यूटर चलाना, सिलाई-कढ़ाई और ड्राइविंग जैसे स्वरोजगार परक काम सिखाए जा रहे हैं। सुकमा पुलिस अधीक्षक के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाले पूर्व नक्सलियों को भी इन विकास कार्यों से जोड़ा जा रहा है ताकि वे मुख्यधारा में लौटकर समाज के नवनिर्माण में अपनी भूमिका निभा सकें। ग्रामीणों का कहना है कि अब उन्हें बंदूक की गूंज के बजाय ट्रैक्टरों और गाड़ियों की आवाजें सुनाई देती हैं, जो इस बात का प्रतीक हैं कि सुकमा का वनांचल अब हिंसा के दौर को पीछे छोड़कर विकास और समृद्धि की एक नई सुबह की ओर मजबूती से कदम बढ़ा रहा है।
Reported By The Hdsmit Universal Hearld Desk

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