कोरबा ज़िला: एशिया की सबसे बड़ी खदान 'गेवरा' में भारी भूस्खलन, कोयला उत्पादन आंशिक रूप से प्रभावित
राहत की बात यह रही कि भूस्खलन के समय उस विशिष्ट डेंजर ज़ोन में कोई भी माइनिंग मजदूर या भारी डंपर मशीन मौजूद नहीं थी, जिससे एक बहुत बड़ा और भयानक हादसा होने से टल गया और किसी के हताहत होने की कोई खबर नहीं है। एसईसीएल प्रबंधन ने तुरंत संज्ञान लेते हुए खदान में सुरक्षा सायरन बजाकर काम को रोका और मलबे को हटाने के लिए दर्जनों बड़ी पोकलेन और क्रेन मशीनों को काम पर लगाया है। अधिकारियों का कहना है कि मलबे को पूरी तरह साफ करने और मार्ग को दोबारा सुरक्षित बनाने में कम से कम 24 से 36 घंटे का समय लग सकता है। कोरबा से देश के कई राज्यों के पावर प्लांटों को कोयला भेजा जाता है, इसलिए प्रबंधन युद्ध स्तर पर काम कर रहा है ताकि देश के थर्मल पावर स्टेशनों में कोयले की किल्लत न हो।
Reported by : the hdsmit universal heral

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