महाराष्ट्र के औद्योगिक क्षेत्र में पर्यावरण और जन स्वास्थ्य की रक्षा के लिए महाआंदोलन: खदानों के खिलाफ हजारों ग्रामीणों का अनिश्चितकालीन धरना शुरू
MAHARASHTRA, CHANDRAPUR
Reported by The HDSMIT Universal Herald
महाराष्ट्र के 'ब्लैक गोल्ड सिटी' और देश के प्रमुख औद्योगिक हब कहे जाने वाले चंद्रपुर जिले के अंतर्गत आने वाले कोयला खदान परिक्षेत्र में आज पर्यावरण pollution, अवैध फ्लाई एश डंपिंग और स्थानीय आबादी के स्वास्थ्य के साथ हो रहे खिलवाड़ को लेकर एक बहुत बड़ा और अभूतपूर्व जन आंदोलन शुरू हो गया है। महाराष्ट्र के विभिन्न स्थानीय सामाजिक-पर्यावरण संगठनों के संयुक्त बैनर तले आयोजित इस विशाल और चरणबद्ध विरोध प्रदर्शन में हजारों की संख्या में स्थानीय ग्रामीण, प्रभावित किसान, महिलाएं और पर्यावरण कार्यकर्ता शामिल हुए। आंदोलनकारियों ने महाराष्ट्र के इस प्रमुख खदान क्षेत्र में स्थापित बिजली संयंत्रों और वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (WCL) के क्षेत्रीय कार्यालयों के ठीक सामने विशाल तंबू गाड़कर अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है।
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे महाराष्ट्र के वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ताओं और नेताओं ने आरोप लगाया कि क्षेत्र में स्थापित विभिन्न निजी और सार्वजनिक कोयला वाशरियों, रिजेक्ट कोयला आधारित थर्मल पावर प्लांटों और उनके भारी परिवहन तंत्रों का संचालन पिछले ढाई दशकों से पर्यावरण नियमों को पूरी तरह ताक पर रखकर किया जा रहा है। महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPCB) के कड़े दिशा-निर्देशों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है, जिसके कारण चंद्रपुर के दर्जनों गांवों की हवा, पानी और मिट्टी पूरी तरह से विषैली हो चुकी है। खदानों और पावर प्लांटों से निकलने वाली उड़ने वाली राख (Fly Ash) को महाराष्ट्र के इन ग्रामीण क्षेत्रों के खुले खेतों, तालाबों और नदियों के किनारे अवैध रूप से डंप किया जा रहा है, जिससे कृषि भूमि बंजर हो रही है और भूजल स्तर प्रदूषित हो रहा है।
प्रदर्शनकारियों ने महाराष्ट्र के राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम जिला प्रशासन को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा है। उनकी मुख्य मांगों में शामिल है कि इन तमाम कोयला कंपनियों के संचालन, पर्यावरण स्वीकृतियों और फ्लाई एश के अवैध परिवहन की सघन जांच के लिए एक उच्च स्तरीय न्यायिक आयोग का गठन किया जाए। इसके साथ ही, उन्होंने महाराष्ट्र के इन प्रभावित गांवों में तत्काल 'मल्टी-एजेंसी फॉरेंसिक और हेल्थ ऑडिट' कराने की पुरजोर मांग उठाई है। क्षेत्र में अत्यधिक वायु प्रदूषण के कारण स्थानीय बुजुर्गों और बच्चों में सांस, फेफड़े और त्वचा से जुड़ी गंभीर बीमारियां फैल रही हैं। महाराष्ट्र के इन आंदोलनकारियों ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांगों पर लिखित प्रशासनिक समझौता नहीं होता, वे खदानों से कोयले के वाणिज्यिक परिवहन को पूरी तरह ठप रखेंगे।

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