CHHATTISGARH, RAIPUR
Reported by The HDSMIT Universal Herald
छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय (High Court of Chhattisgarh) ने आज राज्य के एक बेहद संवेदनशील, बहुचर्चित और वर्षों पुराने राजनीतिक-न्यायिक विवाद से जुड़े कानूनी मामले की गहन सुनवाई करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को एक बहुत बड़ी और महत्वपूर्ण विधिक राहत प्रदान की है। माननीय उच्च न्यायालय की एकल पीठ ने राज्य की राजधानी रायपुर के सिविल लाइंस थाने में वर्ष 2017-18 के दौरान दर्ज किए गए कुख्यात और सनसनीखेज 'मॉर्फ्ड सीडी वितरण और ब्लैकमेलिंग कांड' (Morphed CD Case) में पूर्व मुख्यमंत्री के खिलाफ चल रही सभी आपराधिक कार्यवाहियों, पुलिस जांचों और निचली अदालतों द्वारा जारी किए गए दंडात्मक आदेशों के क्रियान्वयन पर तत्काल प्रभाव से अंतरिम रोक (interim stay) लगा दी है। इस उच्च स्तरीय अदालती फैसले के बाद छत्तीसगढ़ के राजनीतिक हलकों में एक बार फिर से कानूनी और राजनीतिक बहस छिड़ गई है।
उच्च न्यायालय में हुई इस महत्वपूर्ण सुनवाई के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की ओर से देश के वरिष्ठ वकीलों और विधिक विशेषज्ञों ने अपनी मजबूत दलीलें पेश कीं। उन्होंने अदालत को बताया कि यह पूरा मामला विशुद्ध रूप से राजनीतिक विद्वेष, छवि को धूमिल करने और राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को प्रताड़ित करने के उद्देश्य से तत्कालीन सत्तारूढ़ प्रशासनिक व्यवस्था द्वारा दर्ज कराया गया था। वकीलों ने तर्क दिया कि मामले की प्राथमिक जांच (FIR) और इसके बाद पेश की गई चार्जशीट में उनके मुवक्किल के खिलाफ कोई भी प्रत्यक्ष, तकनीकी या संज्ञेय साक्ष्य मौजूद नहीं है, और यह पूरी तरह से अनुमानों पर आधारित है। इसलिए इस मामले की न्यायिक कार्यवाही को जारी रखना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा।
दूसरी ओर, राज्य सरकार के महाधिवक्ता (Advocate General) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के विशेष अभियोजकों ने इस अंतरिम राहत का पुरजोर विरोध किया। उन्होंने दलील दी कि यह मामला बेहद गंभीर प्रकृति का है जिसमें सामाजिक और राजनीतिक पदों पर बैठे व्यक्तियों की निजता और चरित्र हनन की कोशिश की गई थी, इसलिए इसकी न्यायिक जांच को तार्किक अंत तक ले जाना बेहद आवश्यक है। उच्च न्यायालय ने दोनों पक्षों की लंबी और तीखी विधिक बहसों को विस्तार से सुनने और केस डायरी के दस्तावेजों का अवलोकन करने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री को अंतरिम राहत देना उचित समझा। अदालत ने मामले की अगली नियमित सुनवाई के लिए सभी संबंधित पक्षों को विस्तृत जवाब और मूल रिकॉर्ड पेश करने के लिए समय सीमा तय की है। इस अदालती आदेश के बाद जहां विपक्षी खेमे में खुशी की लहर है, वहीं सत्तारूढ़ दल ने कहा है कि वे कानून के शासन और न्यायपालिका के हर आदेश का पूरा सम्मान करते हैं।
Comments
Post a Comment