छत्तीसगढ़ के सरगुजा और बस्तर संभाग में मलेरिया का प्रकोप तेजी से फैल रहा है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने राज्य सरकार को जारी किया नोटिस।


 अंबिकापुर (सरगुजा जिला) और प्रभावित वनांचल गांव, छत्तीसगढ़ - छत्तीसगढ़ के आदिवासी बाहुल्य सरगुजा और बस्तर संभाग के ग्रामीण इलाकों में मॉनसून की बारिश के साथ ही 'मलेरिया' (Malaria) महामारी का रूप लेता जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा चलाए जा रहे डोर-टू-डोर जांच अभियान के दौरान अकेले सरगुजा जिले के विभिन्न वनांचल गांवों में 74 नए मलेरिया पॉजिटिव मरीज मिलने से हड़कंप मच गया है। राज्य में लगातार बढ़ती मौतों और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी की खबरों पर कड़ा संज्ञान लेते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने छत्तीसगढ़ सरकार के मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।

सरगुजा संभाग के उदयपुर, लखनपुर और मैनपाट ब्लॉक के कई अंदरूनी गांवों में जलभराव और गंदगी के कारण मच्छरों का प्रकोप अत्यधिक बढ़ गया है। स्वास्थ्य विभाग की मोबाइल मेडिकल यूनिट्स जब इन गांवों में ब्लड स्लाइड की जांच करने पहुंची, तो सामूहिक रूप से लोग मलेरिया से पीड़ित पाए गए। गंभीर रूप से बीमार मरीजों को अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल में रेफर किया गया है। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि उनके गांवों में न तो समय पर मच्छरदानी का वितरण किया गया और ना ही डीडीटी (DDT) का छिड़काव कराया गया, जिसके कारण यह बीमारी इतनी तेजी से फैली।
मानवाधिकार आयोग ने अपने नोटिस में इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की है कि बस्तर और सरगुजा संभाग के कुछ जिलों में पिछले दो हफ्तों के भीतर मलेरिया और अज्ञात बुखार के कारण कई बच्चों और ग्रामीणों की जान जा चुकी है। आयोग ने सरकार से पूछा है कि प्रभावित क्षेत्रों में डॉक्टरों और जीवन रक्षक दवाओं की क्या स्थिति है और इस बीमारी को फैलने से रोकने के लिए आपातकालीन स्तर पर क्या कदम उठाए जा रहे हैं। एनएचआरसी ने स्पष्ट किया है कि नागरिकों को बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करना सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारी है और इसमें किसी भी तरह की लापरवाही मानवाधिकारों का उल्लंघन है।
इधर, रायपुर में स्वास्थ्य मंत्री ने विभाग के उच्च अधिकारियों के साथ एक आपातकालीन समीक्षा बैठक की। सरकार की ओर से दावा किया गया है कि प्रभावित संभागों में 'मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़' अभियान के तहत व्यापक स्तर पर काम शुरू कर दिया गया है। सरगुजा और बस्तर संभाग के प्रत्येक ब्लॉक में नोडल अधिकारी तैनात किए गए हैं जो रोजाना मरीजों की मॉनिटरिंग कर रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित गांवों में डॉक्टरों की अतिरिक्त टीमें भेजी हैं और गंभीर मरीजों के लिए एम्बुलेंस की व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि वनांचल क्षेत्रों में मलेरिया फैलने का एक मुख्य कारण शुद्ध पेयजल की कमी और पारंपरिक झाड़-फूंक (Superstition) पर निर्भरता भी है। कई ग्रामीण बीमार होने पर अस्पताल जाने के बजाय स्थानीय बैगा-गुनिया से इलाज कराते हैं, जिससे स्थिति अंतिम समय में बेहद नाजुक हो जाती है। स्वास्थ्य विभाग अब नुक्कड़ नाटकों और स्थानीय भाषा में लाउडस्पीकर के माध्यम से ग्रामीणों को जागरूक कर रहा है कि वे बुखार आने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र जाकर मुफ्त खून जांच और प्रामाणिक इलाज करवाएं।
Reported By - The Hdsmit Universal Heral Desk Chhatishgarh

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