राजनांदगांव कृषि-तकनीकी क्रांति: राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत 'स्मार्ट ड्रोन-ड्रिवन फार्मिंग' नीति लागू

राजनांदगांव, छत्तीसगढ़: छत्तीसगढ़ के अग्रणी कृषि प्रधान जिले राजनांदगांव में पारंपरिक कृषि पद्धतियों को पूरी तरह से आधुनिक, वैज्ञानिक और अधिक उत्पादक बनाने के लिए राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत एक जिला-व्यापी 'स्मार्ट ड्रोन-ड्रिवन फार्मिंग नीति' (Smart Drone-Driven Farming Policy) को आधिकारिक रूप से लागू कर दिया है। इस अनूठी नीति के तहत राजनांदगांव के हजारों धान और सोयाबीन उत्पादक किसानों को फसलों की सटीक निगरानी, कीटनाशकों के नपा-तुला छिड़काव और मृदा स्वास्थ्य (Soil Health) के डिजिटल विश्लेषण के लिए अत्याधुनिक कृषि-ड्रोनों के उपयोग पर 80% तक की भारी सरकारी सब्सिडी प्रदान की जा रही है।
राजनांदगांव जिले में इस तकनीक के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्रों (KVK) को नोडल केंद्रों के रूप में विकसित किया गया है, जहाँ ग्रामीण युवाओं और प्रगतिशील किसानों को 'प्रमाणित ड्रोन पायलट' के रूप में प्रशिक्षित किया जा रहा है। ये कृषि ड्रोन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मल्टी-स्पेक्ट्रल थर्मल कैमरों से लैस हैं, जो खेत के ऊपर उड़ान भरते समय फसल में लगने वाले रोगों, कीटों के हमले, पानी की कमी और पोषक तत्वों की वास्तविक स्थिति का सटीक डेटा एकत्र करते हैं। इस डेटा के आधार पर किसान केवल प्रभावित पौधों पर ही दवाओं का छिड़काव करते हैं, जिससे कृषि लागत में 40% तक की भारी बचत होती है।
इस कृषि-तकनीकी क्रांति ने राजनांदगांव की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक नया आधुनिक आयाम दिया है, जिससे रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से होने वाले भूमि के नुकसान को रोका जा सका है और प्रति एकड़ पैदावार में औसतन 25% की वृद्धि दर्ज की गई है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि राजनांदगांव का यह सफल ड्रोन मॉडल आने वाले समय में पूरे छत्तीसगढ़ के कृषि क्षेत्र के लिए एक रोल मॉडल साबित होगा, जो जलवायु परिवर्तन के दौर में भी राज्य की खाद्य सुरक्षा और किसानों की आय को सुरक्षित रखने में एक गेम-चेंजर की भूमिका निभाएगा।
  • रिपोर्ट: द एचडस्मिट यूनिवर्सल डेस्क

 

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