MAHARASHTRA, MUMBAI
Reported by The HDSMIT Universal Herald
महाराष्ट्र के सामाजिक ताने-बाने, समृद्ध सांस्कृतिक पहचान और प्राचीन लोक रीति-रिवाजों की सुरक्षा के लिए राज्य सरकार ने आज एक बड़ा और दूरगामी कानूनी कदम उठाया है। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में मुंबई स्थित मंत्रालय भवन में आयोजित महाराष्ट्र कैबिनेट की एक अत्यंत महत्वपूर्ण और उच्च स्तरीय बैठक में "महाराष्ट्र धार्मिक स्वतंत्रता संरक्षण विधेयक" के नए और कड़े मसौदे को औपचारिक रूप से मंजूरी दे दी गई है। महाराष्ट्र के विभिन्न हिस्सों, विशेषकर ग्रामीण अंचलों और जनजातीय क्षेत्रों में पिछले कुछ समय से सामने आ रही अवैध, कपटपूर्ण और प्रलोभन-आधारित धार्मिक धर्मान्तरणों (illegal religious conversions) की गंभीर शिकायतों को स्थायी रूप से रोकने के लिए यह नया और बेहद सख्त कानून लाया जा रहा है।
कैबिनेट द्वारा मंजूर किए गए इस नए विधेयक के कानूनी प्रावधानों के अनुसार, बलपूर्वक, डरा-धमकाकर, धोखे से, वित्तीय या सामाजिक प्रलोभन देकर, या फिर शादी का झांसा देकर किए जाने वाले किसी भी तरह के धार्मिक परिवर्तन को महाराष्ट्र के भीतर पूरी तरह से गैर-कानूनी, गैर-जमानती और एक गंभीर दंडनीय अपराध की श्रेणी में रखा गया है। विधेयक में यह भी प्रावधान किया गया है कि यदि कोई व्यक्ति या संस्था इस कानून का उल्लंघन करती पाई जाती है, तो उसके खिलाफ भारी वित्तीय जुर्माने के साथ-साथ कई वर्षों के कठोर कारावास की सजा तय की जाएगी। इसके अतिरिक्त, यदि कोई नागरिक अपनी पूर्ण स्वेच्छा और बिना किसी दबाव के अपना धर्म बदलना चाहता है, तो उसे एक निश्चित वैधानिक समय सीमा से पहले महाराष्ट्र के संबंधित जिला मजिस्ट्रेट (DM) के समक्ष एक औपचारिक घोषणा पत्र और आवेदन प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा।
कैबिनेट बैठक के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने इस कानून की आवश्यकता पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र की प्राचीन संस्कृति और संतों की भूमि की पारंपरिक आस्था हमारे राज्य की मूल आत्मा है, और किसी भी बाहरी तत्व को कपटपूर्ण तरीकों से इस सामाजिक समरसता को बिगाड़ने की अनुमति नहीं दी जा सकती। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कानून किसी भी व्यक्ति की व्यक्तिगत धार्मिक स्वतंत्रता पर रोक नहीं लगाता, बल्कि यह उन संगठित और अवैध तत्वों के खिलाफ एक मजबूत सुरक्षा चक्र है जो भोले-भाले नागरिकों को गुमराह करते हैं। इस विधेयक के महाराष्ट्र कैबिनेट से पारित होने के बाद अब इसे आगामी विधानसभा सत्र के पटल पर विधिवत चर्चा और स्थायी कानून बनाने के लिए पेश किया जाएगा।
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