सोलापुर की टेक्सटाइल और चादर इंडस्ट्री को पुनर्जीवित करने के लिए विशेष 'कौशल विकास और सब्सिडी' पैकेज की घोषणा
[भारत / महाराष्ट्र / सोलापुर] - अपनी प्रसिद्ध सूती चादरों (सोलापुरी चद्दर्स) और उत्कृष्ट टेक्सटाइल बुनाई उद्योग के लिए दुनिया भर में एक अलग पहचान रखने वाले सोलापुर जिले के पारंपरिक कपड़ा उद्योग को आधुनिक प्रतिस्पर्धा के इस दौर में दोबारा संजीवनी देने और स्थानीय बुनकरों को आर्थिक रूप से सुदृढ़ करने के लिए महाराष्ट्र वस्त्र मंत्रालय ने एक बहुत बड़े 'विशेष पुनरुद्धार और सब्सिडी पैकेज' की आधिकारिक घोषणा की है। पिछले कुछ वर्षों में कच्चे माल (सूत) की बढ़ती कीमतों, बिजली दरों में उछाल, और आधुनिक पावरलूम मशीनों की कमी के कारण सोलापुर के सैकड़ों पारंपरिक कपड़ा कारखाने और हथकरघा इकाइयां बंद होने की कगार पर पहुंच गई थीं, जिससे हजारों स्थानीय बुनकर और मजदूर बेरोजगार हो रहे थे। इस गंभीर संकट को दूर करने के लिए सरकार ने इस विशेष पैकेज के तहत सोलापुर के कपड़ा उद्योगों के लिए बिजली दरों में 30% की भारी छूट और नई अत्याधुनिक कंप्यूटरीकृत पावरलूम मशीनें खरीदने के लिए 40% तक की भारी वित्तीय सब्सिडी देने का निर्णय लिया है।
इसके साथ ही, सोलापुर के युवा बुनकरों और डिजाइनरों को वैश्विक फैशन और अंतरराष्ट्रीय बाजारों की मांग के अनुरूप नए और आकर्षक डिजाइन तैयार करने का व्यावहारिक प्रशिक्षण देने के लिए सोलापुर विश्वविद्यालय परिसर के भीतर एक 'नेशनल टेक्सटाइल डिजाइन एंड स्किल डेवलपमेंट सेंटर' की स्थापना भी की जा रही है। इस केंद्र में बुनकरों को अपने उत्पादों की हाई-क्वालिटी पैकेजिंग, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर ऑनलाइन बिक्री, और अपने ब्रांड्स का पेटेंट व जीआई (GI) टैग सुरक्षा हासिल करने की पूरी तकनीकी जानकारी मुफ्त में दी जाएगी। जिला उद्योग केंद्र के अधिकारियों के अनुसार, इस पैकेज के लागू होने से सोलापुर के बंद पड़े टेक्सटाइल यूनिट्स दोबारा शुरू होंगे और सीधे 25,000 से अधिक स्थानीय परिवारों को उनके घर के पास ही सम्मानजनक और स्थाई रोजगार मिलेगा। इस दूरदर्शी पहल से सोलापुर की पारंपरिक चादर और कपड़ा उद्योग एक बार फिर वैश्विक स्तर पर अपनी धाक जमाने के लिए पूरी तरह तैयार हो रहा है।
Reported By The Hdsmit Universal Hearld Desk
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