रायपुर स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट्स के क्रियान्वयन में भारी अनियमितताओं की शिकायत, नगर निगम ने जांच के दिए आदेश

 [भारत / छत्तीसगढ़ / रायपुर] - छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में पिछले कुछ वर्षों से चल रहे स्मार्ट सिटी मिशन के अंतर्गत विभिन्न विकास कार्यों में बड़े पैमाने पर वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं की शिकायतें सामने आई हैं। स्थानीय जन-प्रतिनिधियों और नागरिक मंचों द्वारा लगातार उठाए जा रहे सवालों के बाद, नगर पालिक निगम रायपुर और रायपुर विकास प्राधिकरण (RDA) के संयुक्त तत्वावधान में एक उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन किया गया है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि शहर के मुख्य बाजारों, जैसे पंडरी कपड़ा मार्केट, शास्त्री बाजार और गोलबाजार के आधुनिकीकरण के लिए आवंटित किए गए करोड़ों रुपये के फंड का सही तरीके से उपयोग नहीं किया गया है। कई स्थानों पर नालियों और अंडरग्राउंड केबलिंग का काम आधा-अधूरा छोड़ दिया गया है, जिसके कारण वर्तमान मानसून सत्र में सड़कों पर गंभीर जलजमाव की स्थिति निर्मित हो रही है। व्यापारियों का कहना है कि निर्माण कार्य में अत्यधिक देरी और घटिया सामग्री के इस्तेमाल से न केवल सरकारी खजाने को नुकसान हुआ है, बल्कि उनके दैनिक व्यवसाय पर भी इसका बहुत बुरा असर पड़ा है।

जांच समिति के प्रारंभिक आकलन के अनुसार, कई प्रमुख ठेकेदारों ने अनुबंध की शर्तों का खुला उल्लंघन किया है। तय समय सीमा से करीब डेढ़ साल अधिक का वक्त बीत जाने के बाद भी बूढ़ातालाब (विवेकानंद सरोवर) के सौंदर्यीकरण का दूसरा चरण और तेलीबांधा तालाब (मरीन ड्राइव) के आसपास के ड्रेनेज सिस्टम का काम पूरा नहीं किया जा सका है। सड़कों को खोदकर छोड़ दिए जाने के कारण शहर के व्यस्ततम चौराहों जैसे जयस्तंभ चौक, घड़ी चौक और टाटीबंध पर रोजाना घंटों लंबा ट्रैफिक जाम लग रहा है। नगर निगम कमिश्नर ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए निर्माण कार्य से जुड़ी तीन प्रमुख तकनीकी फर्मों को ब्लैकलिस्ट करने का कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इसके साथ ही, संबंधित जोन के इंजीनियरों से भी स्पष्टीकरण मांगा गया है कि उन्होंने समय पर इन कार्यों की मॉनिटरिंग क्यों नहीं की। प्रशासन ने साफ किया है कि यदि आगामी 15 दिनों के भीतर स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो ठेकेदारों की सुरक्षा निधि (सिक्योरिटी डिपॉजिट) को जब्त कर उनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कराया जाएगा।
इस प्रशासनिक उठापटक के बीच, रायपुर के नागरिकों में भी भारी रोष देखा जा रहा है। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि स्मार्ट सिटी के नाम पर केवल फुटपाथों को तोड़ने और दोबारा बनाने का काम किया जा रहा है, जबकि मुख्य समस्या जैसे कि कचरा प्रबंधन (वेस्ट मैनेजमेंट), आवारा पशुओं पर नियंत्रण और सार्वजनिक शौचालयों की सफाई पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। दलदल सिवनी और मोवा जैसे रिहायशी इलाकों में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) के सुचारू रूप से काम न करने के कारण गंदा पानी सीधे स्थानीय तालाबों में मिल रहा है, जिससे संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा बढ़ गया है। राज्य सरकार के शहरी विकास मंत्रालय ने भी इस मामले में दखल देते हुए रायपुर नगर निगम को निर्देश दिया है कि वे हर हफ्ते चल रहे प्रोजेक्ट्स की प्रोग्रेस रिपोर्ट सीधे मंत्रालय को सौंपें। इस जांच के दायरे में कई रसूखदार अधिकारियों और पूर्व अधिकारियों के आने की संभावना है, जिससे आने वाले दिनों में रायपुर की स्थानीय राजनीति में बड़ा भूचाल आ सकता है।
Reported By The Hdsmit Universal Hearld Desk

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