ताक़तवर कंपनियों के आगे झुका तंत्र? अजय चकोले की शिकायत पर गरमाया आदिवासी ज़मीन पर 'फ्लाई ऐश' डंप करने की साज़िश का मामला!
तमनार के भुईकुर्री में नियमों को ताक पर रखकर सिंगधल स्टील को NOC देने का आरोप; शिकायतकर्ता अजय चकोले और पूजा साहू ने मुख्यमंत्री से उठाई उच्चस्तरीय जांच की मांग
विशेष रिपोर्ट | रायगढ़ / नवा रायपुर:
छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के तमनार तहसील से एक बेहद सनसनीखेज और गंभीर प्रशासनिक धांधली का मामला सामने आया है। आरोप है कि तमनार तहसील के ग्राम पंचायत भुईकुर्री में नियमों और कानूनों को ठेंगा दिखाकर गरीब आदिवासी किसानों की उपजाऊ कृषि भूमि पर उद्योगपति का 'ज़हरीला' कचरा (फ्लाई ऐश) फेंकने का कांट्रैक्ट सेट कर दिया गया है।
इस पूरे खेल और प्रशासनिक लापरवाही के खिलाफ शिकायतकर्ता अजय चकोले (रायपुर) एवं पूजा साहू (ग्राम हर्राडीह, तमनार) ने साझा मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने सीधे मुख्यमंत्री के दरबार में शिकायती पत्र भेजकर भुईकुर्री पंचायत सचिव, घरघोड़ा जनपद CEO और संबंधित कंपनी के पूरे सिंडिकेट की उच्चस्तरीय जांच की मांग ठोक दी है।
💥 खेल क्या रचा गया?
शिकायतकर्ता अजय चकोले द्वारा उजागर किए गए दस्तावेजों के अनुसार, यह पूरा मामला ग्राम बगबुड़ा क्षेत्र से लगी खसरा नंबर 61/2 (1.546 हेक्टेयर) और 61/3 (0.425 हेक्टेयर) जमीन का है। राजस्व रिकॉर्ड चिल्ला-चिल्लाकर कह रहे हैं कि यह जमीन सामरी बाई सिदार, सुमित्रा, सुशीला, कौशिल्या, नंदई, जानकी, दिलेशन और उग्रसेन जैसे गरीब आदिवासी किसानों की है।
लेकिन आरोप है कि Singhal Steel & Power Limited को फायदा पहुंचाने के लिए भुईकुर्री पंचायत के सचिव ने नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए रातों-रात अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) थमा दिया।
🚨 अजय चकोले द्वारा उठाए गए 5 कड़े सवाल... जिन्होंने उड़ाई अधिकारियों की नींद!
फर्जी दस्तखत का खेल?
क्या सच में गरीब आदिवासी किसानों ने अपनी लहलहाती जमीन पर राख (फ्लाई ऐश) फेंकने की इजाजत दी? या बिचौलियों और कंपनी के एजेंटों ने फर्जी अंगूठे और दस्तखत का खेल रचा है?
सचिव को किसने दी इतनी पॉवर?
क्या एक पंचायत सचिव के पास इतना पावर है कि वह आदिवासी कृषि भूमि को औद्योगिक कचरा घर बनाने के लिए NOC जारी कर दे?
संविधान की 5वीं अनुसूची का सरेआम उल्लंघन?
अनुसूचित क्षेत्र होने के नाते रायगढ़ में आदिवासी जमीन के कड़े नियम हैं। क्याइसके लिए कलेक्टर रायगढ़ से लिखित परमिशन ली गई? जमीन का डायवर्जन (लैंड यूज़ चेंज) हुआ भी या नहीं?
जनपद CEO की क्या सांठगांठ?
इस पूरे मामले में घरघोड़ा जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) की भूमिका पर भी गंभीर उंगलियां उठी हैं। क्या साहब ने भी फाइल पर आंखें मूंदकर दस्तखत किए?
प्राकृतिक नाले का गला घोंटा गया!
अजय चकोले का आरोप है कि फ्लाई ऐश डंपिंग का रास्ता साफ करने के लिए वहां बहने वाले प्राकृतिक नाले का रूख (डायवर्जन) ही अवैध रूप से बदल दिया गया है।
🛑 मुख्यमंत्री से अजय चकोले और पूजा साहू की 'आर-पार' मांगें:
फाइल करो ज़ब्त: भुईकुर्री पंचायत सचिव द्वारा जारी NOC की मूल फाइल तत्काल मंगाकर उच्चस्तरीय जांच बैठाई जाए।
डंपिंग पर तुरंत बैन: जांच पूरी होने तक खसरा नंबर 61/2 और 61/3 पर फ्लाई ऐश डंप करने पर तुरंत रोक लगाई जाए।
आमने-सामने जांच: सभी आदिवासी खातेदारों को व्यक्तिगत रूप से बुलाकर उनके अंगूठे और दस्तखत का प्रशासनिक सत्यापन हो।
नाले का सर्वे: CECB, राजस्व, जल संसाधन और पंचायत विभाग की संयुक्त टीम तुरंत मौके पर पहुंचे और प्राकृतिक नाले के अवैध डायवर्जन पर केस दर्ज करे।
दोषियों पर कड़ा एक्शन: बिचौलियों, कंपनी प्रबंधकों और दागी अधिकारियों पर कड़ी कानूनी व अनुशासनात्मक कार्रवाई हो।
✍️ सम्पादकीय टिप्पणी:
जैसा कि शिकायतकर्ता अजय चकोले ने स्पष्ट किया है—यह मामला सिर्फ राख फेंकने का नहीं, बल्कि आदिवासियों के हक, उनकी जमीन और पर्यावरण पर सीधे डाके का है। अब देखना यह है कि प्रदेश का शासन-प्रशासन इस पावरफुल औद्योगिक सिंडिकेट पर शिकंजा कसता है या मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है।
Reported by: The HDSMIT Universal Herald Chhattisgarh Desk

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