राजनंदगांव कृषि उपज मंडी में डिजिटल ई-नाम प्रणाली लागू, किसानों को बिचौलियों से मिली मुक्ति

[भारत / छत्तीसगढ़ / राजनंदगांव] - छत्तीसगढ़ के प्रमुख कृषि प्रधान जिलों में से एक, राजनंदगांव की केंद्रीय कृषि उपज मंडी में केंद्र और राज्य सरकार के साझा प्रयासों से राष्ट्रीय कृषि बाजार यानी 'ई-नाम' (e-NAM) डिजिटल ट्रेडिंग प्रणाली को पूरी तरह से और अनिवार्य रूप से लागू कर दिया गया है। इस आधुनिक डिजिटल व्यवस्था के लागू होने से राजनंदगांव और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के हजारों धान, दलहन और तिलहन उत्पादक किसानों के जीवन में एक बड़ा और सकारात्मक बदलाव आया है। पूर्व की पारंपरिक व्यवस्था में किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए स्थानीय आढ़तियों और बिचौलियों पर निर्भर रहना पड़ता था, जो अक्सर कार्टेल बनाकर किसानों की उपज को कम दामों पर खरीदते थे और तौल में भी हेराफेरी की शिकायतें आम थीं। लेकिन अब ई-नाम पोर्टल के जरिए राजनंदगांव मंडी के किसान अपनी फसल का ऑनलाइन पंजीकरण कराकर देश भर के सैकड़ों बड़े व्यापारियों और मिलर्स को सीधे अपनी उपज बेच पा रहे हैं।

ई-नाम प्रणाली की कार्यप्रणाली के संबंध में मंडी सचिव ने बताया कि जैसे ही कोई किसान अपनी ट्रैक्टर-ट्रॉली लेकर मंडी परिसर में प्रवेश करता है, सबसे पहले उसकी फसल का एक वैज्ञानिक सैंपल लिया जाता है। मंडी के भीतर स्थापित अत्याधुनिक लैब में आधुनिक मशीनों के जरिए कुछ ही मिनटों में फसल की गुणवत्ता (जैसे नमी का स्तर और दानों का आकार) की जांच की जाती है और उसकी रिपोर्ट ई-नाम पोर्टल पर अपलोड कर दी जाती है। इस डिजिटल रिपोर्ट को देखकर देश के किसी भी कोने में बैठा व्यापारी ऑनलाइन बोली (ऑक्शन) लगाता है। जिस व्यापारी की बोली सबसे ऊंची और किसान के लिए फायदेमंद होती है, उसे सॉफ्टवेयर स्वतः चुन लेता है। पूरी प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी और मानवीय हस्तक्षेप से मुक्त होती है। फसल की बिक्री फाइनल होते ही, निर्धारित राशि सीधे किसान के लिंक्ड बैंक खाते में आरटीजीएस (RTGS) के माध्यम से ट्रांसफर कर दी जाती है, जिससे किसानों को भुगतान के लिए हफ्तों इंतजार नहीं करना पड़ता।
इस डिजिटल क्रांति से राजनंदगांव के किसानों में भारी उत्साह देखा जा रहा है। किसानों का कहना है कि अब उन्हें अपनी उपज का सही और प्रतिस्पर्धी मूल्य मिल रहा है, जिससे उनकी आय में प्रति एकड़ 20 से 30 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई है। जिला प्रशासन ने मंडी परिसर के भीतर किसानों के ठहरने के लिए एक सर्वसुविधायुक्त 'किसान कैंटीन' और विश्राम गृह की भी शुरुआत की है, जहां उन्हें बेहद रियायती दरों पर पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जाता है। इसके अलावा, मंडी में आने वाले वाहनों के सुचारू प्रबंधन के लिए पूरे परिसर को वाई-फाई और डिजिटल डिस्प्ले बोर्ड से लैस किया गया है, जो पल-पल की बाजार कीमतों को प्रदर्शित करते हैं। राजनंदगांव कलेक्टर ने कृषि विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे अंदरूनी गांवों में विशेष जागरूकता शिविर लगाएं ताकि जो छोटे किसान अभी भी डिजिटल तकनीक से अनजान हैं, उन्हें ई-नाम ऐप डाउनलोड करने और उसका उपयोग करने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा सके।
Reported By The Hdsmit Universal Hearld Desk

 

Comments