धमतरी के गंगरेल बांध के कैचमेंट एरिया में सघन 'बांस वृक्षारोपण' अभियान, भू-क्षरण रोकने का बड़ा प्रयास
राज्य: छत्तीसगढ़ (धमतरी) - छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े जलस्रोतों में से एक और रायपुर-धमतरी की जीवनरेखा माने जाने वाले 'रविशंकर सागर गंगरेल बांध' की भंडारण क्षमता को गाद (Silt) जमा होने के कारण होने वाले नुकसान से बचाने के लिए वन विभाग ने एक बड़ा वानिकी प्रोजेक्ट शुरू किया है। बांध के मुख्य कैचमेंट एरिया (जलग्रहण क्षेत्र) की पहाड़ियों और नदी तटों पर मिट्टी के कटाव (Soil Erosion) को रोकने के उद्देश्य से आज सुबह से व्यापक पैमाने पर 'बांस वृक्षारोपण' (Bamboo Afforestation) अभियान की शुरुआत की गई है।
जल संसाधन विभाग के इंजीनियरों के अनुसार, मानसून के दौरान पहाड़ियों से बहकर आने वाली मिट्टी बांध के तलवे में जमा हो जाती है, जिससे पानी रोकने की वास्तविक क्षमता हर साल कम हो रही है। बांस के पौधों की जड़ें मिट्टी को बहुत मजबूती से जकड़ कर रखती हैं, जिससे मूसलाधार बारिश के बावजूद भू-क्षरण नहीं होता। इस परियोजना के तहत वन विभाग स्थानीय वन प्रबंधन समितियों के माध्यम से ५०० हेक्टेयर से अधिक पडीक भूमि पर ३ लाख बांस के पौधे लगा रहा है। यह प्रोजेक्ट न केवल बांध की उम्र बढ़ाएगा, बल्कि भविष्य में स्थानीय आदिवासियों को बांस शिल्प और कटाई के माध्यम से कुटीर उद्योग के लिए प्रचुर मात्रा में कच्चा माल भी उपलब्ध कराएगा।
Reported by the hdsmit universal heral desk

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