महाराष्ट्र के तटीय जिलों में अनवरत भारी बारिश से कृषि भूमि जलमग्न: किसानों के उग्र विरोध के बाद प्रशासन हरकत में, ड्रेनेज सिस्टम बहाल

 MAHARASHTRA, RATNAGIRI

Reported by The HDSMIT Universal Herald
महाराष्ट्र के तटीय कोंकण क्षेत्र और उससे सटे मैदानी व तराई अंचलों में पिछले कई दिनों से हो रही मूसलाधार और अनवरत मानसूनी बारिश के कारण ग्रामीण जनजीवन और कृषि व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हुई है। महाराष्ट्र के रत्नागिरी जिले और उसके समीपवर्ती ग्रामीण इलाकों में स्थिति तब बेहद तनावपूर्ण हो गई जब लगभग 50 एकड़ से अधिक उपजाऊ कृषि भूमि और उसमें लगी खड़ी फसलें लगातार हो रही बारिश और जलभराव के कारण पूरी तरह से पानी में डूब गईं। महाराष्ट्र के इन खेतों में पिछले एक सप्ताह से अधिक समय से घुटनों तक पानी जमा रहने के कारण नई फसलें सड़ने की कगार पर पहुंच गई थीं, जिससे आक्रोशित और आर्थिक नुकसान झेल रहे सैकड़ों स्थानीय किसान सड़कों पर उतर आए और मुख्य मार्ग पर चक्का जाम कर उग्र विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।
किसानों के इस अचानक और बड़े आंदोलन की सूचना मिलते ही महाराष्ट्र के स्थानीय जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया। कलेक्टर के निर्देश पर स्थानीय तहसीलदार, जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ इंजीनियर और सिंचाई विभाग के अधिकारी तुरंत भारी पुलिस बल और आपदा राहत दलों के साथ मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने आंदोलनकारी किसानों से सीधे बातचीत की और उनकी समस्याओं को सुना। महाराष्ट्र के किसानों ने आरोप लगाया कि क्षेत्र में कुछ स्थानों पर किए गए अवैध निर्माण और मुख्य जल निकासी नाले (main drainage canal) की नियमित सफाई न होने के कारण उनके खेतों से पानी बाहर नहीं निकल पा रहा है, जिससे उनकी पूरे साल की मेहनत पर पानी फिरने की स्थिति पैदा हो गई है।
स्थिति की गंभीरता और किसानों के आक्रोश को देखते हुए महाराष्ट्र के प्रशासनिक अधिकारियों ने बिना कोई समय गंवाए तत्काल मौके पर ही कई भारी जेसीबी (JCB) मशीनों, पोकलेन और ड्रेनेज एक्सपर्ट्स की टीमों को तैनात कर दिया। अधिकारियों की देखरेख में युद्ध स्तर पर कार्रवाई करते हुए प्राकृतिक जल प्रवाह को बाधित करने वाले अवरोधों, मलबे और बंद ड्रेनेज सिस्टम को पूरी तरह से साफ कराया गया। ड्रेनेज खुलने के महज कुछ ही घंटों के भीतर महाराष्ट्र के इन खेतों से पानी का स्तर तेजी से कम होने लगा, जिसके बाद संतुष्ट होकर किसानों ने अपना चक्का जाम और आंदोलन समाप्त किया। महाराष्ट्र के जिला प्रशासन ने राजस्व अधिकारियों को तत्काल निर्देश जारी किए हैं कि वे प्रभावित गांवों का स्थलीय दौरा कर बाढ़ और अत्यधिक वर्षा से फसलों को हुए वास्तविक नुकसान का सर्वेक्षण तैयार करें, ताकि महाराष्ट्र शासन के नियमों के तहत पीड़ित किसानों को जल्द से जल्द उचित वित्तीय मुआवजा राशि वितरित की जा सके।

Comments