राज्य: छत्तीसगढ़ (विशेष रिपोर्ट - रायपुर) - छत्तीसगढ़ विधानसभा के पांच दिवसीय मानसून सत्र के पहले ही दिन सदन के भीतर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच अभूतपूर्व राजनीतिक गतिरोध देखने को मिला। मानसून सत्र की शुरुआत होते ही विपक्षी दलों ने राज्य में किसानों को दिए जाने वाले धान के बकाया बोनस, रबी फसलों के लिए बिजली आपूर्ति की किल्लत और स्थानीय युवाओं के लिए सरकारी नौकरियों में आरक्षण नीति की वर्तमान स्थिति को लेकर स्थगन प्रस्ताव पेश किया। विपक्ष का आरोप है कि राज्य सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था और युवाओं के रोजगार से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा करने से लगातार बच रही है, जिसके कारण प्रदेश के युवाओं और कृषक समाज में भारी असंतोष पनप रहा है।
सदन की कार्यवाही जैसे ही शुरू हुई, विपक्ष के विधायकों ने गर्भगृह में आकर नारेबाजी शुरू कर दी। मुख्य मुद्दा धान खरीदी के बाद किसानों के खातों में बोनस राशि के हस्तांतरण में हो रही तकनीकी और प्रशासनिक देरी का था। विपक्षी नेताओं ने दावा किया कि सहकारी बैंकों की लचर व्यवस्था के कारण छत्तीसगढ़ के सीमांत किसानों को अपनी उपज का सही मूल्य और प्रोत्साहन राशि समय पर नहीं मिल पा रही है। इसके जवाब में सत्तापक्ष के मंत्रियों ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि वर्तमान सरकार ने अपने कार्यकाल में रिकॉर्ड धान की खरीदी की है और शत-प्रतिशत भुगतान सीधे बैंक खातों (DBT) के माध्यम से पारदर्शी तरीके से किया जा रहा है।
हंगामे का दूसरा बड़ा कारण राज्य की 58 प्रतिशत आरक्षण नीति पर आया हालिया विधिक मोड़ रहा। स्थानीय युवाओं के लिए तृतीय और चतुर्थ श्रेणी की नौकरियों में जिला स्तरीय आरक्षण को लेकर दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। विपक्ष ने मांग की कि सरकार इस विषय पर एक श्वेत पत्र जारी करे और स्पष्ट करे कि लंबित पड़ी सरकारी भर्तियों को कब तक पूरा किया जाएगा। जब विधानसभा अध्यक्ष ने बार-बार सदस्यों से अपनी सीटों पर लौटने और शून्यकाल की कार्यवाही चलने देने की अपील की, तो उसका कोई असर नहीं हुआ। सदन में बढ़ते शोर-शराबे और सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए अध्यक्ष ने पहले कार्यवाही को 10 मिनट के लिए और बाद में पूरे दिन के लिए स्थगित करने की घोषणा कर दी। इस राजनीतिक रस्साकशी के कारण पहले दिन का विधायी कार्य पूरी तरह से प्रभावित रहा।
Reported by the hdsmit universal heral
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