महाराष्ट्र की आर्थिक संप्रभुता: व्यापार और औद्योगिक अवसंरचना का वैश्विक हब बनने की ओर अग्रसर

 MAHARASHTRA, MUMBAI

Reported by The HDSMIT Universal Herald
वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में चल रहे बड़े उथल-पुथल और अंतरराष्ट्रीय विनिर्माण कंपनियों द्वारा एशिया में नए रणनीतिक विकल्पों की तलाश के बीच, महाराष्ट्र सरकार ने राज्य को दुनिया की अग्रणी आर्थिक महाशक्ति बनाने की दिशा में एक युगांतकारी नीतिगत कदम उठाया है। महाराष्ट्र राज्य विधानसभा ने सर्वसम्मति से "महाराष्ट्र औद्योगिक निवेश और नियामक सरलीकरण विधेयक 2026" को अपनी अंतिम मंजूरी दे दी है। इस ऐतिहासिक कानून के लागू होने के साथ ही महाराष्ट्र पूरे देश का ऐसा पहला औद्योगिक राज्य बन गया है, जिसने नए निवेशों को आकर्षित करने और वैश्विक व्यापारिक घरानों को सुरक्षित माहौल देने के लिए 'भरोसे और वैधानिक जोखिम' पर आधारित एक क्रांतिकारी स्वचालित मंजूरी व्यवस्था (Trust-Based Risk Management Framework) को कानूनी अमलीजामा पहनाया है। इस व्यापक कानून का प्राथमिक और दूरगामी उद्देश्य महाराष्ट्र के भीतर किसी भी नए उद्योग को शुरू करने में होने वाली विभागीय लेटलतीफी, जटिल नौकरशाही प्रक्रियाओं और लालफीताशाही (red tape) को हमेशा के लिए समाप्त करना है, जिससे व्यापार करना और भी सुगम हो सके।
इस नए अधिनियम के मुख्य प्रावधानों के अनुसार, अब महाराष्ट्र में स्थापित होने वाले सभी सूक्ष्म, लघु, मध्यम और बड़े मेगा उद्योगों (MSMEs & Mega Industrial Hubs) को उनके पर्यावरण प्रभाव, सुरक्षा मानकों और श्रम आवश्यकताओं के आधार पर वैज्ञानिक तरीके से अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित किया जाएगा। जो उद्योग कम जोखिम वाले या गैर-खतरनाक (non-hazardous) क्षेत्रों के अंतर्गत आते हैं, उन्हें अपना काम शुरू करने के लिए किसी भी प्रारंभिक भौतिक निरीक्षण (physical inspection) या विभिन्न सरकारी विभागों से महीनों तक मिलने वाली लंबी मंजूरियों का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। वे केवल महाराष्ट्र सरकार के केंद्रीयकृत सिंगल-विंडो डिजिटल पोर्टल पर एक ऑनलाइन स्व-घोषणा (self-declaration) और अनुपालन शपथ पत्र जमा करके वास्तविक समय (real-time) में तत्काल अपनी औद्योगिक गतिविधियों का संचालन शुरू कर सकेंगे।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने मंत्रालय में औद्योगिक नीति और निवेश प्रोत्साहन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की। उन्होंने कहा कि पुरानी व्यवस्थाओं में किसी भी उद्योग को शुरू करने के लिए दर्जनों विभागों के चक्कर लगाने पड़ते थे, जिससे न केवल पूंजी निवेश प्रभावित होता था बल्कि भ्रष्टाचार को भी बढ़ावा मिलता था। नया कानून महाराष्ट्र की पूरी प्रशासनिक व्यवस्था को पारदर्शी, डिजिटल और उत्तरदायी बनाएगा। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा, पर्यावरण और श्रम मानकों से कोई समझौता किए बिना, ईमानदार उद्यमियों को एक सुरक्षित और सहयोगी माहौल देना महाराष्ट्र शासन की सर्वोच्च जिम्मेदारी है। आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि इस कानून के प्रभावी होने से महाराष्ट्र की औद्योगिक विकास दर में रिकॉर्ड वृद्धि होगी और आने वाले वर्षों में स्थानीय युवाओं के लिए विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों में लाखों नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे।

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