जशपुर जिला: छत्तीसगढ़ का पहला 'एग्रो-इको टूरिज्म क्लस्टर' बनकर तैयार, चाय और नाशपाती के बागान बने आकर्षण का केंद्र

 राज्य: छत्तीसगढ़ (विशेष रिपोर्ट - जशपुर) - छत्तीसगढ़ के पूर्वोत्तर छोर पर स्थित और अपनी प्राकृतिक वादियों व ठंडे मौसम के लिए 'छत्तीसगढ़ का स्विट्जरलैंड' कहे जाने वाले जशपुर जिले में राज्य का पहला आधिकारिक "एग्रो-इको टूरिज्म क्लस्टर" (Agro-Eco Tourism Cluster) पूरी तरह से बनकर तैयार हो गया है। जशपुर के सोगड़ा, मैनी और मनोरा विकासखंड के पहाड़ी पठारों (पाट क्षेत्रों) पर विकसित किए गए इस अनूठे पर्यटन हब को छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड और कृषि विभाग ने संयुक्त रूप से तैयार किया है। इसका मुख्य उद्देश्य कृषि के साथ-साथ पर्यावरण पर्यटन को बढ़ावा देकर स्थानीय जनजातीय परिवारों के लिए स्थाई आजीविका के नए आर्थिक स्रोत विकसित करना है।

जशपुर का मौसम और यहाँ की लेटराइट मिट्टी असम और दार्जिलिंग की तरह ही चाय, कॉफी, नाशपाती, स्ट्रॉबेरी आणि काजू की खेती के लिए अत्यंत अनुकूल पाई गई है। इस क्लस्टर के तहत सरकार ने स्थानीय आदिवासी महिला स्व-सहायता समूहों (SHGs) के सहयोग से सैकड़ों एकड़ में फैले 'जशपुर टी एस्टेट' (Tea Estate) और नाशपाती के बागानों को पर्यटकों के भ्रमण के लिए खोल दिया है। यहाँ आने वाले पर्यटक न केवल हरे-भरे चाय के बागानों के बीच घूम सकते हैं, बल्कि पारंपरिक तरीके से चाय की पत्तियां तोड़ने का अनुभव ले सकते हैं आणि मौके पर ही स्थापित प्रोसेसिंग यूनिट में तैयार ऑर्गेनिक ग्रीन टी का स्वाद चख सकते हैं।
पर्यटन बोर्ड ने इस क्लस्टर के भीतर पर्यावरण-अनुकूल 'लकड़ी के कॉटेज' (Wooden Eco-Log Huts), ट्रेकिंग ट्रेल, बर्ड वाचिंग पॉइंट और स्थानीय जनजातीय व्यंजनों के लिए विशेष फूड कोर्ट का निर्माण किया है। इस क्लस्टर के शुरू होने से जशपुर में न केवल राष्ट्रीय स्तर के पर्यटकों की आमद बढ़ेगी, बल्कि सीधे तौर पर 5,000 से अधिक स्थानीय आदिवासियों को गाइड, होमस्टे संचालक, हस्तशिल्प विक्रेता और किसान के रूप में सीधा रोजगार प्राप्त हो रहा है। प्रशासन की इस अनूठी और दूरगामी पहल की सफलता को देखते हुए अब सरगुजा संभाग के मैनपाट और सामरीपाट क्षेत्रों में भी इसी तर्ज पर नए एग्रो-टूरिज्म हब विकसित करने की कार्ययोजना बनाई जा रही है।
Reported by the hdsmit universal heral

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