रायपुर 'स्मार्ट सिटी' ड्रेनेज प्रोजेक्ट पर हाईकोर्ट सख्त, नगर निगम और निर्माण कंपनी को अंतिम चेतावनी

 राज्य: छत्तीसगढ़ (रायपुर) - छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय (बिलासपुर) ने राजधानी रायपुर में चल रहे 'स्मार्ट सिटी ड्रेनेज और सीवरेज प्रोजेक्ट' की धीमी गति पर कड़ा रुख अपनाया है। एक स्थानीय नागरिक संगठन द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने रायपुर नगर निगम के कमिश्नर, स्मार्ट सिटी लिमिटेड के प्रबंध निदेशक और निर्माण कार्य का ठेका लेने वाली निजी इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने जन सुरक्षा से खिलवाड़ और न्यायिक दिशानिर्देशों की अनदेखी के मामले में तीनों पक्षों को कारण बताओ और अवमानना का नोटिस जारी किया है।

याचिकाकर्ता के वकीलों ने अदालत के समक्ष विस्तृत तस्वीरें और तकनीकी रिपोर्ट पेश की, जिसमें दिखाया गया कि राजधानी के मुख्य व्यावसायिक और रिहायशी इलाकों जैसे पंडरी, जयस्तंभ चौक, समता कॉलोनी और शंकर नगर में पिछले कई महीनों से मुख्य सड़कों को ड्रेनेज पाइपलाइन बिछाने के नाम पर खोदकर खुला छोड़ दिया गया है। मानसून की भारी बारिश के कारण इन खोदे गए गड्ढों में पानी भर जाने से पूरी राजधानी में न केवल ट्रैफिक जाम की स्थिति निर्मित हो रही है, बल्कि कई दोपहिया वाहन चालक इन छिपे हुए गड्ढों के कारण दुर्घटना का शिकार होकर गंभीर रूप से घायल हो चुके हैं। इसके अलावा, सीवरेज का पानी पीने की पाइपलाइन में मिलने से कई वार्डों में पीलिया जैसी बीमारियां फैलने का खतरा बढ़ गया है। हाईकोर्ट ने सख्त लहजे में टिप्पणी करते हुए कहा कि 'स्मार्ट सिटी' के नाम पर जनता को इस प्रकार की नारकीय स्थिति में रहने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। अदालत ने रायपुर नगर निगम को आदेश दिया है कि वे अगले सात दिनों के भीतर सभी असुरक्षित और खुले गड्ढों की बैरिकेडिंग करें और एक निश्चित समय सीमा के भीतर सड़कों की मरम्मत का काम पूरा करने का शपथ पत्र प्रस्तुत करें।
Reported by the hdsmit universal heral

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