रायपुर एम्स (AIIMS) में 3D ऑर्गन बायो-प्रिंटिंग का सफल परीक्षण, छत्तीसगढ़ चिकित्सा के क्षेत्र में बना अग्रणी राज्य

 स्थान: छत्तीसगढ़ (रायपुर)

द्वारा रिपोर्ट किया गया: द एचडीस्मिट यूनिवर्सल हेराल्ड डेस्क
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) रायपुर के रीसर्च विंग और टिशू इंजीनियरिंग विभाग के वैज्ञानिकों ने आज सुबह चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में एक बहुत बड़ी और क्रांतिकारी सफलता हासिल की है। वैज्ञानिकों की एक संयुक्त टीम ने छत्तीसगढ़ में पहली बार स्वदेशी तकनीक से निर्मित 3D ऑर्गन बायो-प्रिंटर के माध्यम से मानव शरीर के 'कृत्रिम त्वचा (Skin Tissue) और कॉर्निया' का सफल जैविक परीक्षण किया है। यह उन्नत तकनीक मानव कोशिकाओं (Stem Cells) और विशेष बायो-इंक का उपयोग करके हुबहू असली अंगों जैसी संरचनाएं तैयार करती है, जिससे अंग प्रत्यारोपण (Organ Transplant) के क्षेत्र में क्रांति आने की उम्मीद है।
एम्स रायपुर के निदेशक ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि इस 3D बायो-प्रिंटिंग तकनीक के आने से भविष्य में जलने वाले गंभीर मरीजों (Burn Victims) और आंखों की रोशनी गंवा चुके लोगों को कृत्रिम अंगों के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। पारंपरिक प्लास्टिक सर्जरी या बाहरी डोनर पर निर्भरता कम होने से अंगों के रिजेक्शन का खतरा भी पूरी तरह से समाप्त हो जाता है। केंद्र सरकार के सहयोग से स्थापित इस नए रीसर्च हब के माध्यम से अब छत्तीसगढ़ के स्थानीय शोधकर्ताओं और डॉक्टरों को वैश्विक स्तर का मंच मिला है, जिससे मध्य भारत में अंग विफलता (Organ Failure) से होने वाली मौतों की दर को न्यूनतम स्तर पर लाने में मदद मिलेगी।

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