भिलाई इस्पात संयंत्र आधुनिकीकरण: दुर्ग संभाग में ग्रीन-स्टील उत्पादन के लिए ₹8,000 करोड़ का निवेश

भिलाई, छत्तीसगढ़: दुर्ग संभाग के अंतर्गत आने वाले देश के अग्रणी औद्योगिक केंद्र भिलाई में भारी विनिर्माण और पर्यावरण संरक्षण के समन्वय का एक नया ऐतिहासिक अध्याय प्रारंभ हुआ है। भिलाई इस्पात संयंत्र (BHP) ने कार्बन उत्सर्जन को न्यूनतम स्तर पर लाने और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप 'ग्रीन-स्टील' (पर्यावरण-अनुकूल इस्पात) का उत्पादन शुरू करने के लिए ₹8,000 करोड़ की एक विशाल आधुनिकीकरण महा-परियोजना की घोषणा की है। इस भारी निवेश के माध्यम से संयंत्र के दशकों पुराने ब्लास्ट फर्नेस और कोयला-आधारित ऊर्जा प्रणालियों को पूरी तरह से हाइड्रोजन-मिश्रित स्वच्छ ऊर्जा तकनीकों पर स्थानांतरित किया जाएगा।
यह परियोजना ऐसे समय में क्रियान्वित की जा रही है जब वैश्विक बाजारों में कम कार्बन फुटप्रिंट वाले औद्योगिक उत्पादों की मांग चरम पर है। भिलाई इस्पात संयंत्र के तकनीकी प्रभाग के अनुसार, इस आधुनिकीकरण के अंतर्गत एक विशाल स्क्रैप-आधारित इलेक्ट्रिक आर्क फर्नेस (EAF) की स्थापना की जाएगी, जो पारंपरिक उत्पादन विधियों की तुलना में लगभग 70% कम कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन करेगी। इसके साथ ही, संयंत्र के भीतर ही एक अत्याधुनिक औद्योगिक जल पुनर्चक्रण (Water Recycling) प्रणाली स्थापित की जा रही है, जो शिवनाथ नदी से लिए जाने वाले औद्योगिक जल की खपत को 45% तक कम कर देगी, जिससे दुर्ग और भिलाई के शहरी क्षेत्रों के लिए पेयजल की उपलब्धता और अधिक सुरक्षित हो जाएगी।
आर्थिक और औद्योगिक विशेषज्ञों का मानना है कि भिलाई इस्पात संयंत्र का यह ऐतिहासिक आधुनिकीकरण छत्तीसगढ़ के भारी उद्योग क्षेत्र को एक वैश्विक पहचान प्रदान करेगा। इस मेगा प्रोजेक्ट के माध्यम से अगले पांच वर्षों के भीतर भिलाई और दुर्ग के स्थानीय सहायक उद्योगों (Ancillary Industries) को ₹1,500 करोड़ से अधिक के नए आपूर्ति ऑर्डर प्राप्त होंगे, जिससे मंदी की आशंकाएं पूरी तरह समाप्त हो जाएंगी। इसके अतिरिक्त, इस निर्माण और तकनीकी बदलाव की प्रक्रिया में क्षेत्र के 8,500 से अधिक स्थानीय कुशल इंजीनियरों और तकनीकी श्रमिकों के लिए प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष रोजगार के नए अवसरों का सृजन होगा, जो दुर्ग जिले की आर्थिक रीढ़ को और अधिक सुदृढ़ बनाएगा।
  • रिपोर्ट: द एचडस्मिट यूनिवर्सल डेस्क

 

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