दुर्ग और भिलाई पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में अंतरराज्यीय साइबर ठग गिरोह का पर्दाफाश। डिजिटल अरेस्ट के नाम पर करोड़ों की ठगी करने वाले 7 आरोपी गिरफ्तार।
दुर्ग के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि पिछले कुछ महीनों से जिले में 'डिजिटल अरेस्ट' से जुड़ी ठगी की शिकायतें लगातार बढ़ रही थीं। भिलाई के एक रिटायर्ड स्टील प्लांट कर्मचारी से इस गिरोह ने खुद को सीबीआई (CBI) और मुंबई पुलिस का अधिकारी बताकर उनके बैंक खाते से 45 लाख रुपये ट्रांसफर करवा लिए थे। ठगों ने पीड़ित को स्काइप (Skype) वीडियो कॉल पर एक नकली पुलिस स्टेशन का सेटअप दिखाकर डराया था कि उनके नाम से भेजे गए पार्सल में ड्रग्स और अवैध हथियार मिले हैं, और यदि वे जेल जाने से बचना चाहते हैं तो उन्हें 'सीक्रेट वेरिफिकेशन अकाउंट' में अपने सारे पैसे ट्रांसफर करने होंगे।
इस गंभीर मामले की जांच के लिए दुर्ग पुलिस ने एक विशेष एंटी-क्राइम एंड साइबर यूनिट (ACCU) का गठन किया। पुलिस ने जब उन बैंक खातों के ट्रांजैक्शन की कड़ियों को जोड़ना शुरू किया, जिनमें पैसे ट्रांसफर हुए थे, तो उनके तार भिलाई के ही कुछ संदिग्ध युवकों से जुड़े मिले। पुलिस ने सटीक सूचना के आधार पर भिलाई के नेहरू नगर और सुपेला इलाके के दो फ्लैटों में एक साथ छापेमारी की। वहां चल रहे इस अवैध कॉल सेंटर को देखकर पुलिस भी दंग रह गई। आरोपी बेहद शातिर तरीके से डार्क वेब (Dark Web) से लोगों का डेटा खरीदते थे और फिर उन्हें डराने के लिए वीओआइपी (VoIP) कॉल्स का इस्तेमाल करते थे।
गिरफ्तार किए गए आरोपियों के पास से पुलिस ने 24 मोबाइल फोन, 15 जाली आधार कार्ड, 32 विभिन्न बैंकों के पासबुक और चेकबुक और करीब 8 लाख रुपये की नगदी जब्त की है। शुरुआती पूछताछ में खुलासा हुआ है कि इस गिरोह के तार जामताड़ा, नूंह और म्यांमार स्थित बड़े इंटरनेशनल साइबर सिंडिकेट से जुड़े हुए हैं। ये लोग ठगी की रकम को तुरंत क्रिप्टोकरेंसी (USDT) में बदलकर विदेशों में बैठे अपने आकाओं को भेज देते थे, जिससे पैसों को ट्रैक करना बेहद मुश्किल हो जाता था। दुर्ग पुलिस ने इन बैंक खातों को फ्रीज करवा दिया है जिनमें अभी भी लाखों रुपये जमा हैं।
दुर्ग-भिलाई पुलिस की इस कड़क कार्रवाई की पूरे राज्य में तारीफ हो रही है। पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि भारत में कानूनन 'डिजिटल अरेस्ट' जैसी कोई व्यवस्था नहीं है। कोई भी सरकारी एजेंसी, सीबीआई, पुलिस या ईडी कभी भी वीडियो कॉल पर किसी को गिरफ्तार नहीं करती और न ही पैसों की मांग करती है। यदि किसी नागरिक के पास ऐसा कोई संदिग्ध कॉल आता है, तो वे डरे बिना तुरंत अपने नजदीकी पुलिस स्टेशन या राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर '1930' पर संपर्क कर अपनी शिकायत दर्ज कराएं, ताकि समय रहते ठगी को रोका जा सके।
Reported By - The Hdsmit Universal Hearl Desk Chhatishgarh

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