रायपुर शहरी विस्तार: आरडीए द्वारा 353 एकड़ भूमि पर महा-टाउनशिप परियोजना की घोषणा
रायपुर, छत्तीसगढ़: रायपुर विकास प्राधिकरण (आरडीए) ने लगभग सोलह वर्षों के एक लंबे अंतराल के पश्चात राजधानी क्षेत्र के भौगोलिक, आवासीय और व्यावसायिक परिदृश्य को बदलने वाली एक अत्यंत महत्वाकांक्षी शहरी विकास परियोजना का आधिकारिक अनावरण किया है। नवा रायपुर के अत्यंत निकट और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मार्ग पर स्थित पीरदा और तुलसी गाँव की लगभग 353 एकड़ बहुमूल्य भूमि पर एक विशाल 'स्मार्ट इको-टाउनशिप' का निर्माण किया जाएगा। यह मेगा प्रोजेक्ट ऐसे समय में लाया गया है जब रायपुर शहर में तीव्र औद्योगीकरण, कॉर्पोरेट विस्तार और शैक्षणिक संस्थानों की वृद्धि के कारण जनसंख्या का दबाव और आवासीय मांग अपने ऐतिहासिक उच्चतम स्तर पर पहुँच चुकी है।
इस परियोजना की सबसे बड़ी प्रशासनिक और सामाजिक विशेषता इसका भूमि एकत्रीकरण प्रारूप यानी 'लैंड पूलिंग मॉडल' है। पारंपरिक रूप से की जाने वाली अनिवार्य भूमि अधिग्रहण की नीतियां अक्सर लंबी कानूनी लड़ाइयों, किसानों के असंतोष, मुआवजे के विवादों और स्थानीय समुदायों के विस्थापन का कारण बनती थीं। इन सभी सामाजिक और कानूनी समस्याओं से बचने के लिए आरडीए ने पूरी तरह से प्रगतिशील और पारदर्शी लैंड पूलिंग नीति को अपनाया है। इस नीति के अंतर्गत, स्थानीय कृषक और भूमि स्वामी बिना किसी दबाव के, अपनी कृषि भूमि स्वेच्छा से विकास प्राधिकरण को सौंप रहे हैं। प्राधिकरण पूरी 353 एकड़ भूमि को एक एकीकृत मास्टर充 प्लान के तहत विकसित करेगा।
इस मास्टर प्लान के अनुसार, जब आरडीए संबंधित भूमि पर फोर-लेन कंक्रीट मुख्य मार्ग, आंतरिक कंक्रीट सड़कें, भूमिगत विद्युत केबल ग्रिड, स्मार्ट जल-निकासी (सीवेज) प्रणालियां, वर्षा जल संचयन संरचनाएं और विशाल हरित जन-उद्यानों का निर्माण पूरी तरह से पूर्ण कर लेगा, तब मूल भूमि स्वामियों को उनकी कुल समर्पित भूमि का ठीक 40% हिस्सा पूरी तरह से विकसित, व्यावसायिक रूप से अत्यधिक मूल्यवान आवासीय या व्यावसायिक भूखंड के रूप में वापस सौंप दिया जाएगा। इस अभिनव व्यवस्था से कृषक और स्थानीय ग्रामीण विस्थापित नहीं होंगे, बल्कि वे इस शहरीकरण की प्रक्रिया में सीधे तौर पर हिस्सेदार बनकर उभरेंगे, क्योंकि विकसित भूखंड की कीमत उनकी मूल कृषि भूमि से कई गुना अधिक होगी।
इस 353 एकड़ की वृहद टाउनशिप को एक आत्मनिर्भर और पर्यावरण-अनुकूल 'शहरी पारिस्थितिकी तंत्र' के रूप में डिजाइन किया गया है। परियोजना के नक्शे में आधुनिक शैक्षणिक संस्थानों के लिए पृथक क्षेत्र, अत्याधुनिक बहु-विशेषज्ञता अस्पतालों के लिए भूखंड, आईटी पार्क और खुदरा व्यापार केंद्रों के लिए उच्च-घनत्व वाले व्यावसायिक क्षेत्र तथा कम कार्बन पदचिह्न (लो-कार्बन फुटप्रिंट) वाले आवासीय ब्लॉकों को स्थान दिया गया है। कुल योजनाबद्ध क्षेत्र का लगभग 18% हिस्सा केवल हरित आवरण और सार्वजनिक पार्कों के लिए आरक्षित किया गया है। आर्थिक विश्लेषकों का अनुमान है कि पीरदा-तुलसी महा-टाउनशिप परियोजना आगामी सात वर्षों में निजी क्षेत्र से ₹5,000 करोड़ से अधिक के निर्माण और बुनियादी ढांचा निवेश को आकर्षित करेगी, जो राजधानी क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को एक अभूतपूर्व उछाल प्रदान करेगा।
- रिपोर्ट: द एचडस्मिट यूनिवर्सल डेस्क

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