छत्तीसगढ़ विधानसभा ने ऐतिहासिक 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस बिल, 2026' पास किया। एमएसएमई और स्टार्टअप्स को मिलेगी लालफीताशाही से मुक्ति।
इस विधेयक के प्रावधानों के अनुसार, अब छत्तीसगढ़ में नया उद्योग, एमएसएमई (MSME) या स्टार्टअप्स शुरू करने के लिए व्यापारियों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने और महीनों तक 'अनापत्ति प्रमाण पत्र' (NOC) का इंतजार करने की जरूरत नहीं होगी। सरकार ने 'सेल्फ-सर्टिफिकेशन' (स्व-प्रमाणन) और 'डीम्ड क्लियरेंस' की नीति को कानूनी अमलीजामा पहना दिया है। इसका मतलब यह है कि यदि कोई उद्यमी अपनी जमीन और पर्यावरण मानकों के सही दस्तावेज ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड करता है, तो उसे तुरंत काम शुरू करने की अनंतिम मंजूरी मिल जाएगी।
उद्योग मंत्री ने सदन में बिल पेश करते हुए कहा कि पुरानी व्यवस्था के तहत लालफीताशाही (Red Tapism) और इंस्पेक्टर राज के कारण कई बड़े निवेशक छत्तीसगढ़ से विमुख हो रहे थे। नया कानून पूरी व्यवस्था को डिजिटल और पारदर्शी बनाएगा। यदि कोई सरकारी विभाग निर्धारित समय सीमा (Time Limit) के भीतर किसी उद्योग के आवेदन पर निर्णय नहीं लेता है, तो सॉफ्टवेयर के माध्यम से उसे स्वचालित रूप से 'स्वीकृत' (Approved) मान लिया जाएगा। इससे भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी और अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी। [1]
व्यापारिक संगठनों जैसे कैट (CAIT) और छत्तीसगढ़ चैंबर ऑफ कॉमर्स ने सरकार के इस फैसले का जोरदार स्वागत किया है। उद्योगपतियों का कहना है कि बिजली कनेक्शन, भूमि डायवर्सन और स्थानीय निकायों से मिलने वाली मंजूरियों में होने वाली देरी ही किसी भी नए व्यवसाय की सबसे बड़ी बाधा होती थी। नए कानून से न केवल छत्तीसगढ़ के स्थानीय युवाओं को अपना स्टार्टअप शुरू करने की हिम्मत मिलेगी, बल्कि देश-विदेश की बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियां (MNCs) भी छत्तीसगढ़ को अपने मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में चुनेंगी, जिससे राज्य में लाखों नए रोजगार सृजित होंगे।
विपक्ष ने हालांकि इस बिल के कुछ प्रावधानों पर आपत्ति जताते हुए कहा कि पर्यावरण और श्रमिक हितों से जुड़े नियमों में ज्यादा ढील नहीं दी जानी चाहिए, जिससे उद्योगों द्वारा स्थानीय पर्यावरण को नुकसान पहुंचाया जा सके। इस पर सरकार ने आश्वस्त किया कि यह प्रणाली केवल 'प्रक्रिया को आसान' बनाने के लिए है, नियमों को तोड़ने के लिए नहीं। यदि कोई उद्योग गलत जानकारी देकर सेल्फ-सर्टिफिकेशन का दुरुपयोग करता पाया गया, तो उस पर भारी जुर्माने के साथ-साथ उसकी यूनिट को तुरंत सील करने और आपराधिक मुकदमा दर्ज करने का कड़ा प्रावधान भी इस कानून में शामिल किया गया है।
Reported By - The Hdsmit Universal Hearl Desk Chhatishgarh

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