कश्मीर के कुलगाम में आतंकी हमले में मारे गए छत्तीसगढ़ के दो मजदूरों के परिवारों को सीएम विष्णु देव साय ने 20-20 लाख रुपये मुआवजा देने की घोषणा की।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मारे गए दोनों मजदूर छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा और बिलासपुर जिले के ग्रामीण इलाकों के रहने वाले थे, जो अपनी आजीविका कमाने और परिवार का पेट पालने के लिए कश्मीर गए थे। कुलगाम में आतंकवादियों ने गैर-स्थानीय मजदूरों को निशाना बनाते हुए अंधाधुंध फायरिंग कर दी, जिसमें इन दोनों निर्दोष श्रमिकों की मौके पर ही मौत हो गई। घटना की खबर जैसे ही उनके पैतृक गांवों में पहुंची, वहां सन्नाटा पसर गया और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। ग्रामीणों में इस बात को लेकर भारी गुस्सा है कि निहत्थे और गरीब मजदूरों को किस गुनाह की सजा दी गई।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने केंद्रीय गृह मंत्रालय और जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल (LG) प्रशासन से फोन पर बात कर घटना की पूरी जानकारी ली है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए हैं कि दोनों दिवंगत श्रमिकों के पार्थिव शरीरों को पूरी गरिमा और सम्मान के साथ हवाई मार्ग से उनके गृह ग्राम छत्तीसगढ़ लाने की तत्काल व्यवस्था की जाए। इसके लिए राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों की एक टीम को दिल्ली और श्रीनगर के लिए को-ऑर्डिनेट करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है, ताकि परिजनों को इस संकट की घड़ी में किसी भी तरह की प्रशासनिक परेशानी का सामना न करना पड़े।
मुख्यमंत्री सचिवालय द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि आर्थिक सहायता के अलावा, सरकार पीड़ित परिवारों के बच्चों की शिक्षा का पूरा खर्च उठाएगी और परिवार के एक योग्य सदस्य को स्थानीय स्तर पर रोजगार प्रदान करने की संभावनाओं पर भी विचार कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा, "हमारे छत्तीसगढ़ के सीधे-साधे और मेहनती नागरिक देश के किसी भी हिस्से में सुरक्षित रहने के हकदार हैं। इस कायरतापूर्ण कृत्य के दोषियों को सेना और सुरक्षाबल कड़ा सबक सिखाएंगे। दुख की इस घड़ी में पूरी छत्तीसगढ़ की जनता पीड़ित परिवारों के साथ खड़ी है।"
इस घटना के बाद छत्तीसगढ़ सरकार अब अन्य राज्यों में काम करने जा रहे छत्तीसगढ़िया प्रवासी मजदूरों (Migrant Labourers) की सुरक्षा और उनके अनिवार्य रजिस्ट्रेशन को लेकर एक नई गाइडलाइन बनाने पर विचार कर रही है। श्रम विभाग को निर्देशित किया गया है कि वे असंगठित क्षेत्र के उन सभी मजदूरों का एक व्यापक डेटाबेस तैयार करें जो संवेदनशील राज्यों में रोजगार के लिए जाते हैं, ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति में उन्हें तुरंत सरकारी मदद और सुरक्षा कवच प्रदान किया जा सके।

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