मेधावी युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले माफियाओं पर साय सरकार का कड़ा प्रहार: ऐतिहासिक 'एंटी-पेपर लीक कानून' को विधिवत मंजूरी, दोषियों को होगी 1 करोड़ रुपये तक की सजा

CHHATTISGARH, BILASPUR
Reported by The HDSMIT Universal Herald
छत्तीसगढ़ में पिछली व्यवस्थाओं के दौरान विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं, लोक सेवा आयोग (CGPSC) की भर्तियों और सरकारी नौकरियों के चयन में सामने आए बड़े घोटालों, पेपर लीक और संस्थागत भाई-भतीजावाद से सबक लेते हुए वर्तमान साय सरकार ने एक ऐतिहासिक कानूनी ढांचा तैयार किया है। राज्य की सभी सार्वजनिक परीक्षाओं में पूर्ण शुचिता, पारदर्शिता और विश्वसनीयता बहाल करने के उद्देश्य से विधानसभा द्वारा "छत्तीसगढ़ सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) विधेयक" को कानूनी रूप से पारित कर दिया गया है। इस अत्यंत कड़े एंटी-पेपर लीक कानून के लागू होने के साथ ही परीक्षाओं में धांधली करने वाले संगठित गिरोहों, नकल माफियाओं और भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ राज्य में अब तक की सबसे बड़ी दंडात्मक व्यवस्था स्थापित हो गई है।
इस नए अधिनियम के कठोर प्रावधानों के अनुसार, सार्वजनिक परीक्षाओं में प्रश्नपत्रों को अवैध रूप से लीक करने, परीक्षा से पहले उन्हें सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों पर प्रसारित करने, परीक्षा केंद्रों में अनधिकृत रूप से प्रवेश करने, कंप्यूटर नेटवर्क या डिजिटल संसाधनों से छेड़छाड़ करने, अथवा उत्तर पुस्तिकाओं और मूल्यांकन अभिलेखों (evaluation records) में किसी भी प्रकार का हेरफेर करने को पूरी तरह से गैर-जमानती (non-bailable) और गंभीर संज्ञेय अपराध माना गया है। यदि कोई परीक्षार्थी या बाहरी व्यक्ति इस प्रकार की धांधली में सीधे तौर पर संलिप्त पाया जाता है, तो उसे न्यूनतम एक से पांच वर्ष तक के सश्रम कारावास और 5 लाख रुपये तक के भारी आर्थिक जुर्माने की सजा दी जाएगी। इसके साथ ही दोषी पाए गए परीक्षार्थी को भविष्य की सभी सरकारी परीक्षाओं से स्थायी रूप से प्रतिबंधित कर दिया जाएगा।

इस कानून की सबसे बड़ी मार परीक्षा आयोजित कराने वाली उन बाहरी एजेंसियों, निजी प्रिंटिंग प्रेसों, सेवा प्रदाताओं (service providers) या कोचिंग संस्थानों पर पड़ेगी जो इस संगठित अपराध के पीछे मास्टरमाइंड होते हैं। यदि कोई संस्था या कंपनी इसमें दोषी पाई जाती है, तो उस पर न्यूनतम 1 करोड़ रुपये तक का आर्थिक दंड लगाया जाएगा, उसकी संपत्ति कुर्क की जाएगी और परीक्षा के आयोजन की पूरी लागत उसी से वसूल की जाएगी। इसके अतिरिक्त, ऐसी संस्थाओं को न्यूनतम तीन वर्षों के लिए किसी भी प्रकार की सरकारी परीक्षा आयोजित करने के काम से पूरी तरह ब्लैकलिस्ट कर दिया जाएगा। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बिलासपुर और रायपुर के युवा अभ्यर्थियों को सोशल मीडिया के माध्यम से आश्वस्त करते हुए कहा कि पूर्ववर्ती व्यवस्थाओं ने हजारों योग्य और गरीब छात्रों के सपनों को कुचला था, लेकिन यह नया कानून अब किसी भी अपराधी को बख्शेगा नहीं और हर युवा को उसकी मेहनत का पूरा हक दिलाएगा। 

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