बस्तर संभाग में सर्पदंश से हुई मौतों के नाम पर सरकारी मुआवजे की राशि हड़पने वाले एक बड़े रैकेट का पर्दाफाश। 19 लोग गिरफ्तार, सरकारी डॉक्टर भी शामिल

 

 जगदलपुर (बस्तर जिला) और आस-पास के ग्रामीण क्षेत्र, छत्तीसगढ़ - छत्तीसगढ़ के आदिवासी बहुल बस्तर संभाग से एक बेहद चौंकाने वाला और संवेदनशील मामला सामने आया है। बस्तर पुलिस ने एक ऐसे संगठित गिरोह का भंडाफोड़ किया है जो प्राकृतिक या सामान्य रूप से मरने वाले लोगों की मौत को 'सर्पदंश' (सांप का काटना) दिखाकर सरकार से मिलने वाली 4 लाख रुपये की मुआवजा राशि (Ex-Gratia) की धोखाधड़ी कर रहा था। इस हाई-प्रोफाइल घोटाले में पुलिस ने अब तक एक सरकारी डॉक्टर, होमगार्ड के जवान और स्थानीय दलालों सहित कुल 19 लोगों को गिरफ्तार किया है। इस खुलासे के बाद बस्तर राजस्व विभाग और स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया है।

छत्तीसगढ़ सरकार की नीति के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति की मृत्यु सांप के काटने या किसी प्राकृतिक आपदा के कारण होती है, तो उसके परिजनों को आर्थिक सहायता के रूप में 4 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाता है। बस्तर के सुदूर वनांचलों में इस मानवीय योजना का फायदा उठाने के लिए इस गिरोह ने एक पूरा नेटवर्क तैयार कर लिया था। गिरोह के सदस्य ग्रामीण इलाकों में होने वाली किसी भी सामान्य मौत पर नजर रखते थे। इसके बाद वे मृतक के गरीब और अशिक्षित परिजनों को झांसा देकर या उन्हें पैसों का लालच देकर फर्जी दस्तावेज तैयार करने की प्रक्रिया शुरू करते थे।
इस पूरे घोटाले की रीढ़ थे फर्जी पोस्टमार्टम (PM) रिपोर्ट और डेथ सर्टिफिकेट। गिरफ्तार किए गए सरकारी डॉक्टर पर आरोप है कि वह बिना शव का मुआयना किए या सामान्य मौत के मामलों में भी मोटी रकम लेकर पीएम रिपोर्ट में 'मृत्यु का कारण सर्पदंश' लिख देता था। इसके बाद स्थानीय राजस्व कर्मचारियों और दलालों की मदद से फाइल को तेजी से आगे बढ़ाया जाता था। जैसे ही सरकार द्वारा मुआवजे की 4 लाख रुपये की राशि मृतक के परिजनों के खाते में ट्रांसफर होती थी, यह गिरोह उसमें से ढाई से तीन लाख रुपये खुद रख लेता था और परिजनों को मात्र कुछ हजार रुपये थमा दिए जाते थे।
मामले का खुलासा तब हुआ जब एक ही गांव और एक ही परिवार के आस-पास के कई लोगों के सर्पदंश के दावे अचानक जिला मुख्यालय पहुंचे। फाइलों की कतार देखकर बस्तर कलेक्टर को अंदेशा हुआ और उन्होंने एक गोपनीय जांच कमेटी का गठन किया। जांच टीम जब धरातल पर तस्दीक करने पहुंची तो पता चला कि जिन लोगों को कागजों पर सांप के काटने से मरा हुआ दिखाया गया था, असल में उनकी मौत लंबी बीमारी या वृद्धावस्था के कारण हुई थी। कुछ मामलों में तो मृत व्यक्ति के शरीर पर सांप के काटने के कोई निशान ही नहीं थे, फिर भी डॉक्टर ने प्रमाणित रिपोर्ट जारी कर दी थी।
बस्तर पुलिस महानिरीक्षक (IG) ने बताया कि गिरफ्तार किए गए सभी 19 आरोपियों के खिलाफ जालसाजी, धोखाधड़ी और सरकारी धन के गबन की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस बैंक खातों की भी जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस गिरोह ने अब तक सरकार को कितने करोड़ रुपये का चूना लगाया है। अंदेशा जताया जा रहा है कि इस घोटाले के तार बस्तर के अलावा बीजापुर, सुकमा और दंतेवाड़ा जिलों से भी जुड़े हो सकते हैं। प्रशासन अब पिछले तीन वर्षों में संभाग के भीतर स्वीकृत किए गए सभी सर्पदंश मुआवजा मामलों की री-ऑडिट (पुनः जांच) कराने जा रहा है।

Reported By - The Hdsmit Universal Heral Desk Chhatisgarh

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